लखनऊ। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्य पचड़े में फंस गए हैं। बीते माह नौ अप्रैल को टेंडर खुलने थे, मगर अब तक नहीं खोले गए हैं। ऐसे में जो काम दो माह में पूरे होने हैं, उनका आधा समय ऐसे मेंं बीत गया है। इसकी असल वजह क्या है यह तो साफ नहीं है, मगर चर्चा है कि कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल किया जा रहा है।
जिन 12 विकास कार्यों के टेंडर करीब डेढ़ महीने से लॉक हैं, वह सभी कार्य नगर निगम के जोन छह में आने वाले हुसैनाबाद वार्ड के हैं। इस मामले की खास बात यह है कि जो 12 कार्य होने हैं, उनकी लागत 10 लाख से कम है। ऐसे में नगर निगम में चल रही इंजीनियर, ठेकेदार और जनसेवकों की गठजोड़ व्यवस्था में इन कार्यों के टेंडर मनचाहे ठेकेदार को देने के लिए मैनुअल यानि ऑफलाइन होने चाहिए थे, लेकिन पूर्व नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने इनको ऑनलाइन यानि ई टेंडर से कराने का आदेश दे दिया था। इसके बाद 12 कार्यों के लिए करीब 200 से अधिक टेंडर आए हैं, क्योंंकि ज्यादातर ठेकेदारोंं ने इसमें टेंडर डाले हैं, क्योंकि उनको कोई मैनेज नहीं कर पाया। जानकारोंं का कहना है कि इसी कारण टेंडर को खोला नहीं जा रहा है। वहीं, ऑनलाइन टेंडर में पेंच फंसाकर उसे निरस्त कर ऑफलाइन कराने की तैयारी है।
मुख्य अभियंता नगर निगम महेश वर्मा ने बताया कि टेंडर इस वजह से नहीं खुल पाए, क्योंकि हुसैनाबाद में जहां पर काम होना है, वह ट्रस्ट क्षेत्र है। उनकी ओर से कुछ जानकारी मांगी गई थी कि कौन-कौन से काम होंगे और किस तरह होंगे। उसकी जानकारी उनको भेज दी गई है। अब एक-दो दिन में टेंडर खोल दिए जाएंगे।