आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष कुमार ने शुक्रवार को कहा कि नगर निकाय चुनाव में मेरठ और कानपुर में ईवीएम मशीन की गड़बड़ी ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि ईवीएम टेम्पर प्रूफ नही है। ईवीएम को लेकर उठ रही आशंका दूर करने के लिये सरकार को इस मामले में श्वेत पत्र लाना चाहिये।
एक होटल में पत्रकारों को संबोधित करते हुए आशुतोष ने कहा कि लोकतंत्र में विश्वास को बनाए रखने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। लिहाजा निर्वाचन आयोग सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में ईवीएम मशीन की जांच कराकर दोषी पार्टियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाये।
उन्होंने कहा कि पूर्व निर्वाचन आयुक्त टीएन सेशन ने आयोग की गरिमा को बढ़ाने को जो काम किया है वर्तमान में निर्वाचन आयोग के पदों पर आसीन अधिकारियों को उसे कायम रखने की जिम्मेदारी है। हालांकि कुछ पदों पर आसीन अधिकारियों पर सत्तासीन पार्टी से नजदीकियां होने की बात भी सामने आई है।
उन्होंने कहा कि टीएन सेशन भी कांग्रेस पार्टी के काफी नजदीक थे लेकिन उन्होंने अपने पद की गरिमा को बरकरार रखने के लिये कांग्रेस को भी नही छोड़ा। वर्तमान में अधिकारियों को भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए लोकतंत्र के विश्वास को बनाए रखना होगा।
एक सवाल केजवाब में उन्होंने कहा कि भाजपा नेता दावा कर रहे है कि 110 मे से 90 सीटों पर जीतेंगे। ये तभी हो सकता है जब ईवीएम में गड़बड़ी की गई हो। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुऐ कहा कि जो व्यक्ति 25 साल से गोरखपुर का सांसद रहते हुए भी एक अस्पताल नही सुधार सका वो प्रदेश क्या विकास कराएगा।
सोहराबुददीन मामले की सुनवाई कर रहे जज की मौत की हो जांच
आशुतोष ने कहा कि सोहराबुददीन हत्याकांड मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई कोर्ट के जज जस्टिस बृज गोपाल लोया की मौत सामान्य नही है। उन्होंने बताया कि जस्टिस लोया की मौत दिल की वजह धड़कन रुकना बताया गया है जबकि उनके परिवार को लोगों ने उनकी मौत संदिग्ध मानकर जांच की मांग की है।
आशुतोष ने कहा कि सोहराबुददीन मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को जेल जाना पड़ा था और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाही हो चुकी है। उन्होंने बताया कि अपनी जिन्दगी में जस्टिस लोया बता चुके है कि इस मामले को लेकर न्यायपालिका के एक वरिष्ठ के माध्यम से 100 करोड़ रूपये की पेशकश भी उन्हे की गई थी।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में जनता की आस्था बरकरार रखने और जज से जुड़ा मामला होने के नाते सुप्रीम को कोर्ट इसकी निष्पक्ष जांच करार दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुद इस मामले की जांच कराए ताकि उन पर लग रहा आरोप हट सके।