इस तरह गर्मी से राहत पाने की कोशिश में कुछ बच्चे
- फोटो : amar ujala
गर्मी ने गुरुवार के रिकॉर्ड तोड़ दिया। 15 से 25 किमी की रफ्तार से लू चली। पारा 41.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मार्च में अब तक 2010 में 27 मार्च को सबसे ज्यादा पारा 40 डिग्री सेल्शियस दर्ज हुआ था।
पारे की तेजी ने अप्रैल महीने की गर्मी को भी मात दी, पिछले साल 10 अप्रैल 2016 की गर्मी ने 41 डिग्री का आंकड़ा पार किया था।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अधिकतम पारा 41 से ऊपर दर्ज हुआ है जो कि सामान्य से 5 डिग्री सेल्शियस अधिक है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता के मुताबिक पूरे प्रदेश में ड्राई वेदर कंडीशन एक्टिव है। आसमान साफ होने से धूप भी चटख हो रही है।
इसके चलते पारे ने अभी से ही तेजी दिखाई है। चूंकि दिन का अधिकतम पारा सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज हुआ है, पछुआ के तेज झोंकों के साथ लू ने भी बृहस्पतिवार से दस्तक दी। अगले दो-तीन दिन गर्मी के यही तेवर बरकरार रहेंगे। फिलहाल राहत के आसार नहीं हैं।
बादल-बूंदाबांदी से मिल सकती है मामूली राहत
5-6 अप्रैल के आसपास विंड पैटर्न बदलने, पहाड़ों पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव होने से राजधानी समेत आसपास के इलाकों में बादल-बूंदाबांदी से मामूली राहत मिल सकती है।
मार्च की लू से आम पर आया संकट
मार्च में ही 41 पार पारे और लू का असर आम पर पड़ सकता है। मलिहाबाद पिलसुवा के ओमप्रकाश साहू, कजीर अहमद ने बताया कि इससे देर से आने वाली आम की फसल जेसे कि चौसा, लखनऊवा सफेदा चौपट हो सकता है, क्योंकि उनमें अभी बौर आ रहा है।
लू के यही आसार रहे तो झड़ जायेगा, या खराब होगा। जबकि दशहरी पर कम असर पड़ेगा। क्योंकि दशहरी लगभग 70-80 प्रतिशत फसल आ चुकी है, फल भारी होना शुरू हो रहा है। लेकिन इसी अंदाज में लू ज्यादा दिनों तक चलेगी तो दिक्कत करेंगी।
तीन दिनों में 36 से 41 पार का सफर
तारीख--अधिकतम--न्यूनतम
30 मार्च--41.1--20.7
29 मार्च--39.8--22.2
28 मार्च--38.7--20.2
27 मार्च--36.7--19.7
पिछले कुछ सालों में सबसे ज्यादा पारा
तारीख--तापमान
21 मार्च 2016--38.3
29 मार्च 2015--37.6
27 मार्च 2010--40.0 (आल टाइम रिकार्ड)
31 मार्च 2007--39.6