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आज रात कलेवा, कल हरितालिका तीज व्रत

Wed, 27 Aug 2014 03:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सुहाग की मंगलकामना और सुख समृद्धि के लिए महिलाएं बृहस्पतिवार से भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया हरितालिका तीज का व्रत रखेंगी।
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व्रत के पहले महिलाएं बुधवार की मध्यरात्रि से पहले कलेवा कर इस कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत करेंगी।

शिव परिवार का सामूहिक पूजन करने के साथ महिलाएं शिव-गौरा से अखंड सौभाग्य की मंगलकामना करेंगी।

आचार्य प्रदीप ने बताया कि बुधवार रात 10:24 से तृतीया शुरू हो जाएगी, जो बृहस्पतिवार रात 11:43 तक रहेगी।

हरितालिका तीज पर व्रती महिलाएं नदी की चिकनी मिट्टी से शिव परिवार बनाकर उसकी पूजा करेगी।

साथ ही उन्हें दूध, दही, घी, मधु, शर्करा और सफेद मिष्ठान्न युक्तभोग लगाकर यथायोग्य विभिन्न प्रकार के आभूषण और नव वस्त्र अर्पित करेगी।

कथा श्रवण के बाद संध्या, मध्यरात्रि में विधि विधान से पूजन के बाद अगले दिन सुबह पूजन के बाद व्रत का पारण करेगी। इस बीच महिलाएं रात भर भजन कीर्तन कर पूजन करेगी।

आचार्य प्रदीप ने बताया कि पूजन के बाद शाम को बहते पानी शिव परिवार मूर्ति और पूज्य पदार्थों को विसर्जित करना चाहिए।

29 की शाम चंद्र दर्शन से बचें, नहीं तो लगेगा कलंक
लखनऊ। 29 अगस्त की रात अगर भूल वश आपने चांद देखा तो देखने वाले पर चोरी करने का झूठा कलंक भी लग सकता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचना चाहिए। इस दिन चंद्र दर्शन से पाप और चोरी का झूठा कलंक लग सकता है।
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कालांतर में भगवान श्रीकृष्ण ने भूलवश चंद्र दर्शन कर लिया था, तब उन पर मणि चोरी का कलंक लगा था। ज्योतिषाचार्य प्रदीप ने बताया कि बृहस्पतिवार रात 11:43 के बाद से चतुर्थी का मान शुरू हो जाएगा।

शुक्रवार को चतुर्थी में ही चंद्रोदय होगा। निर्णय सिंधु के मुताबिक उस दिन चंद्र दर्शन से बचाना चाहिये।

उन्होंने बताया कि भूलवश अगर कोई चांद देख भी ले उसे श्रीमद्भागवत में स्यमयंतक मणि की कथा का श्रवण करना चाहिये।

आचार्य के मुताबिक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का दूर्वा, जल, दुग्ध, सिंदूर से अभिषेक कर लड्डुओं का नैवेद्य लगाना चाहिए।

आरती के बाद सिद्धिविनायक की आरती पूजन करना चाहिए। आचार्य के मुताबिक रात 9 बजे से पहले चंद्रास्त हो जाएगा, उसके बाद दोष का मान नहीं रहेगा।

ऋषि पंचमी व्रत 30 को
इच्छित वर की प्राप्ति और मंगलकामना के लिए स्त्रियां और युवतियां शनिवार को ऋषि पंचमी का व्रत रखेंगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ऋषि पंचमी के दिन सप्त ऋषियों कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ और वशिष्ठ की पत्नी अरुंधति का पूजन कर आशीर्वाद मांगा जाता है।
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इस दिन सबसे व्रती को पंचगव्य (दूध, दही, घृत, गंगाजल और मधु) से स्नान कर उसका पान करना चाहिए।

मध्यान्ह में लाल चंदन से सप्त ऋषियों की प्रतिमा बनाकर उसका पूजन करना चाहिये और उन्हें ऋतु फल नैवेद्य चढ़ाने चाहिए।

पूजन के बाद ही व्रती महिलाओं को जल और भोज्य पद्धार्थ (लाल चावल, फल और दुग्धपदार्थ) ग्रहण करना चाहिए। इस दिन व्रतियों को हल से जुते हुए अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए।
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