कार्यक्रम में बोलते पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह।
लखनऊ। समय के साथ युवा तेजी से तकनीक से जुड़ते जा रहे हैं, लेकिन बुजुर्गों के लिए यह सफर अब भी धीमा है। हेल्पएज इंडिया ट्रस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, आज भी सिर्फ 13% बुजुर्ग ही इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। यह रिपोर्ट शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में विश्व वरिष्ठ नागरिक दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के मौके पर जारी की गई। इसका मकसद पीढ़ियों के बीच रिश्तों और बुजुर्गों को लेकर समाज की सोच को समझना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अधिकतर युवा अपने बुजुर्गों को भले ही निर्भर मानते हों, लेकिन उन्हें ज्ञान और सम्मान का स्रोत भी मानते हैं। संयुक्त परिवारों में रहने वाले युवा अपने दादा-दादी या नाना-नानी से गहरा भावनात्मक रिश्ता महसूस करते हैं। रिपोर्ट बताती है कि 54% युवा अपने माता-पिता या दादा-दादी को मोबाइल और कंप्यूटर चलाना सिखाने में मदद करते हैं।
हालांकि, बुजुर्गों और युवाओं के बीच संवाद की कमी अब भी महसूस की जाती है। रिपोर्ट में बताया गया कि 88% युवा मानते हैं कि वे बुजुर्ग होने पर अपने परिवार के साथ रहना चाहेंगे, जबकि 83% बुजुर्ग पहले से ही परिवार के साथ रह रहे हैं। 86% बुजुर्ग खुद को परिवार में महत्वपूर्ण और सम्मानित महसूस करते हैं।
दो हैशटैग किए गए शुरू
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव एल. वेंकटेश्वर लू ने कहा कि जैसे बुजुर्ग युवाओं को समझते हैं, वैसे ही युवाओं को भी बुजुर्गों को समझने की जरूरत है। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा कि रोजगार की वजह से लोग गांवों और शहरों से दूर चले जाते हैं, जिससे बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं। उन्होंने बुजुर्गों के संपत्ति अधिकारों और उनके हक की रक्षा के लिए सरकारी निरीक्षकों की नियुक्ति की मांग की। इस मौके पर दो हैशटैग अभियान #मेरीनजरसेदेखो और #मेरेजूतोंमेंचलो शुरू किए गए। करीब 250 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।
10 शहरों के 5700 लोगों से बातचीत कर तैयार हुई रिपोर्ट
हेल्पएज इंडिया के राज्य प्रमुख अनूप पंत ने बताया कि यह रिपोर्ट देश के 10 बड़े शहरों में 5700 लोगों से बातचीत कर तैयार की गई है। उन्होंने बुजुर्गों के साथ संवाद, सम्मान और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।