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दो साल में सात गुना बढ़ीं सोशल मीडिया पर छेड़खानी, सबसे ज्यादा बढ़ा ये अपराध

Thu, 05 Dec 2019 12:46 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में सोशल मीडिया के जरिये महिलाओं के साथ छेड़खानी व ब्लैक मेलिंग के मामलों मे सात गुना शिकायतें बढ़ गई हैं। बुधवार को महिला पावर लाइन 1090 की ओर से जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई। 1090 की एडीजी अंजू गुप्ता ने बताया कि 2017 में साइबर बुलिंग (सोशल मीडिया के जरिये धमकी, छेड़छाड़, अश्लील मैसेज वीडियो भेजना व ब्लैकमेल करना) के मामले में 2017 के मुकाबले 7 गुना बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। 2017 में इस तरह के 3,990 मामले दर्ज किए गए थे जो 2018 में बढ़कर 17,056 हो गए। जबकि 2019 में 1 जनवरी से 30 नवंबर तक 28,578 मामले दर्ज किए गए।

बदनाम करने की कोशिश सबसे ज्यादा  

बदनाम करने की नीयत से लड़कियों की नकली प्रोफाइल बनाना, उनकी तस्वीरों का गलत प्रयोग करना और पोर्नोग्राफी साइटों पर अपलोड करने की सबसे अधिक 53 प्रतिशत शिकायतें मिलीं।

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सोशल मीडिया के जरिये धमकी व उत्पीड़न के 18 प्रतिशत मामले सामने आए। जबकि 17 प्रतिशत शिकायतें आपत्तिजनक मेसेज को लेकर थीं। हैकिंग के सात और ब्लैक मेलिंग के 6 प्रतिशत मामले दर्ज कराए गए। 

गलत इस्तेमाल में व्हाट्सएप नंबर एक 

पीड़ित महिलाओं की सबसे अधिक शिकायतें व्हाट्सएप से संबंधित थीं। दूसरे नंबर पर फेसबुक और तीसरे नंबर पर इंस्टाग्राम रहा। एडीजी ने दावा किया कि जो शिकायतें महिला पावर लाइन के पास आईं, उसमें से 99 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है। 


23 हजार से अधिक शिकायतें आ रही प्रति माह 

अंजू गुप्ता ने बताया कि 1090 सेवा के सॉफ्टवेयर को बेहतर किया गया है और इस सेवा का प्रचार प्रसार बढ़ाया गया है, जिससे 2017 में जहां प्रति माह औसतन साढ़े 18 हजार से 19 हजार लड़कियों की मदद की जाती थी, वहीं अब लगभग 23 हजार से अधिक शिकायतें प्रतिमाह दर्ज की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि 2017 में 12 महीने में कुल 2,21,943 शिकायतें 1090 पर दर्ज की गई थीं। 2018 में यह संख्या 2,66,005 हो गई और 2019 के जनवरी से अक्तूबर तक 2,37,018 शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें से 98.80 प्रतिश शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 1090 पर भरोसा बढ़ा है। 2017 में जहां कुल शिकायतों की 14 प्रतिशत शिकायतें ही ग्रामीण क्षेत्रों से आती थीं, वहीं 2019 में यह प्रतिशत बढ़कर 46 प्रतिशत हो चुका है।
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अगले तीन महीने में जमीन पर दिखने लगेंगे सेफ सिटी के काम

अंजू गुप्ता ने निर्भया फंड के तहत चल रही परियोजनाओं के बारे में बताया कि 89.3 करोड़ रुपये से जो प्रोजेक्ट संचालित किए जा रहे हैं वह अगले तीन महीने में जमीन पर दिखने लगेंगे। इसमें सबसे अधिक खर्च इंटीग्रेटेड स्मार्ट कंट्रोल रूम के लिए आ रहा है, जिसमें 67.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

शहर में संवेदनशील स्थानों पर लगने वाले 1500 कैमरे इस कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे। इसके लिए लखनऊ पुलिस लाइन में बिल्डिंग बनाई जाएगी। इसके अलावा महिला पावर लाइन की क्षमता दोगुनी किए जाने के लिए 80 टर्मिनल (कंप्यूटर) के लिए नया सेटअप तैयार करना है।

इसके अलावा 100 से अधिक पिंक बूथ बनाए जाने हैं। पेट्रोलिंग केलिए 110 पिंक स्कूटर और 10 एसयूपी खरीदी जानी है।

जुलाई में मिला बजट

एडीजी ने बताया कि निर्भया फंड के तहत बजट इसी वर्ष जुलाई में स्वीकृत किया गया है। इसमें अधिकतर काम सिविल के हैं, जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाती है और पार्ट में भुगतान किया जाता है।

ऐसे में जो फंड रिलीज हुआ है, उसे खर्च होने में थोड़ा समय लगेगा। उन्होंने बताया कि फरवरी तक जिस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, वह जमीन पर नजर आने लगेंगे।
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