लखनऊ। पुरानी पेंशन बहाली, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने और पीएचडी वेतन वृद्धि समेत 31 सूत्री मांगों को लेकर प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों ने गुरुवार को जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय-महाविद्यालय शिक्षक संघ (फुपुक्टा) के आह्वान पर यह आंदोलन किया जा रहा है। शिक्षक दो नवंबर से काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। फुपुक्टा ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर 17, 18 और 19 नवंबर को लखनऊ में क्रमिक धरना दिया जाएगा।
ज्ञापन में पुरानी पेंशन बहाल करने, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, पीएचडी इंक्रीमेंट देने, फीडर कैडर की व्यवस्था लागू करने, आमेलित शिक्षकों की पूर्व सेवा अवधि को अनुभव में जोड़ने और पारिश्रमिक दरों में वृद्धि की मांग की गई है। इसके अलावा अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेने, वर्ष में केवल एक बार परीक्षा कराने, पूर्व की तरह चिकित्सकीय अवकाश देने और स्थानांतरण में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की बाध्यता समाप्त करने की मांग भी शामिल है।
फुपुक्टा के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सरकार को शिक्षकों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। उनकी जायज मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए। महामंत्री प्रो. प्रदीप सिंह ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने पर शिक्षक समुदाय आंदोलन तेज करेगा। उपाध्यक्ष डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं। उनकी उपेक्षा राष्ट्र की उपेक्षा है। संयुक्त मंत्री डॉ. अमित कुमार राय ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं होने से समाज की रचनात्मक शक्ति भी प्रभावित होगी।