लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों ने पीएचडी कराने का अधिकार दिए जाने की मांग कर
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को महाविद्यालयों के शिक्षकों ने पीएचडी कराने का अधिकार दिए जाने की मांग कर धरना दिया। लविवि महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय के नेतृत्व में हरदोई, रायबरेली सहित करीब 33 महाविद्यालयों के शिक्षक धरने में शामिल हुए।
लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने कहा कि विवि प्रशासन यूजीसी अधिनियम 2022 के नाम पर मनमाने तरीके से कॉलेजों के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित कर रहा है। वहीं, राजभवन की ओर से लुआक्टा प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया। इसके चलते शिक्षकों ने राजभवन की ओर कूच करने का निर्णय बदल दिया।
संघ का दावा राजभवन से मिला ये आश्वासन
शिक्षक संघ का दावा है कि राजभवन की ओर से वार्ता में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के तौर पर कुलसचिव लखनऊ विश्वविद्यालय, अधिष्ठाता अकादमिक प्रोफेसर गीतांजलि मिश्रा, अधिष्ठाता प्रवेश प्रोफेसर पंकज माथुर और विश्वविद्यालय के विधिक सलाहकार प्रोफेसर आनंद विश्वकर्मा उपस्थित रहे। इस दौरान लुआक्टा ने राज भवन को विश्वविद्यालय के संशोधित आदेश के बारे में बताया गया। जिस पर राजभवन ने स्पष्ट किया कि संशोधन किसी एक विश्वविद्यालय का अधिकार नहीं है। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय की ओर से अध्यादेश पारित कर राज भवन भेजा जाता है तो इसे मंजूरी नहीं दी जाएगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों ने पीएचडी कराने का अधिकार दिए जाने की मांग कर
लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों ने पीएचडी कराने का अधिकार दिए जाने की मांग कर