लखनऊ। अमर उजाला की पहल पर विद्यार्थियों की ओर से चयनित शिक्षकों को सोमवार को शिक्षक श्रेष्ठ सम्मान 2022 से उच्च शिक्षा, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री ने सम्मानित किया। भारतेंदु नाट्य अकादमी के सहयोग से थ्रस्ट थियेटर सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में 51 स्कूलों के एक-एक शिक्षक का सम्मान किया गया। इस दौरान उच्च शिक्षा बोर्ड के उपाध्यक्ष मुकुल चतुर्वेदी, बीएनए के अध्यक्ष रवि शंकर खरे व विशेष शिक्षक श्रेष्ठ सम्मान से सम्मानित किए गए अकादमी के निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना मौजूद रहे। संचालन बिंदु जैन ने किया। इस मौके पर शिक्षाविद् एचएन जायसवाल, सुधीर मिश्र, कुसुम वर्मा, रजा और अनवर हुसैन आदि मौजूद रहे।
प्रतिभा को तलाशना और उसे तराशना गुरु का कर्तव्य
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आप पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। प्रतिभा को तलाशना और उसे तराशना गुरु का कर्तव्य है। स्वामी विवेकानंद से किसी ने प्रश्न किया था कि मानव जीवन में शिक्षा की आवश्यकता है या संस्कार की, जवाब में उन्होंने कहा संस्कारयुक्त शिक्षा की आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति विवेकानंद के कथन के अनुरूप तैयार हुई है जिसके मूल में शिक्षा को संस्कार, रोजगार व तकनीक से जोड़ना है। छात्रों का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आप रोजगार पाने वाले नहीं रोजगार देने वाला बनें। जो रोजगार पाता है उसका व्यक्तिगत जीवन व परिवार समृद्घ होता है लेकिन जब वह रोजगार देने वाला बनता है तो राष्ट्र समृद्घ होता है। उन्होंने अमर उजाला को बधाई देते हुए कहा कि जीवन के मूल बिंदु शिक्षकों का सम्मान किया जा रहा है, जो एक लोकतांत्रित व्यवस्था से चयनित होकर आए हैं।
इनकी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं प्रभावी
कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन से की। इसके बाद लखनऊ इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के एकेडमिक कोऑर्डिनेटर व कथक डांसर सिद्घार्थ राय ने गणेश वंदना की सुंदर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर पायनियर मॉन्टेसरी स्कूल एल्डिको के छात्रों ने भक्ति गीत हर हर शंभू... पर मनमोहक सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति दी। छात्रा शांभवी शुक्ला ने शिक्षक व शिक्षक दिवस का महत्व बताया।
इनका हुआ सम्मान
पायनियर मॉन्टेसरी एल्डिको शाखा-शिव कुमार यादव व विकासनगर से-पूनम सिन्हा, जयपुरिया गोयल कैंपस से सावित्री चगुंलानी, अवध कॉलिजिएट पारा- शिवम त्रिपाठी व रामगढ़ शाखा से-नीलम विरानी, सीपीएल इंटर कॉलेज-टीआर वर्मा, हीरालाल यादव पब्लिक स्कूल-संजय सिंह, कुम्हरावां इंटर कॉलेज-जयप्रकाश, एमिकस एकेडमी-जैनब खान, यूनिटी कॉलेज -जफर जैदी, शिवानी पब्लिक स्कूल से फाल्गुनी ताल्लुकेदार, एसआर ग्लोबल स्कूल बीकेटी-सुनील वर्मा, जीजीआईसी विकासनगर-ममता निगम, बालिका विद्यालय मोतीनगर-अनिता श्रीवास्तव, हॉर्नर कॉलेज-परमिता सिंह, प्रकाश बाल विद्या मंदिर-राजेंद्र वर्मा, पं. ब्रह्मदत्त इंटर कॉलेज-शैलेंद्र सिंह, नवीन पब्लिक स्कूल मोहनलालगंज-श्वेता सक्सेना, एपीएस एकेडमी-पारितोष गुप्ता, ब्राइटलैंड इंटर कॉलेज-सीमा साहनी, राजकुमार इंटर कॉलेज-आस्मा टंडन, स्कॉलर्स अकेडमी न्यू जेल रोड मोहनलालगंज-अभिषेक शर्मा, प्रगतिशील इंटर कॉलेज मलिहाबाद-आरती मौर्य, राजीव गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज-जितेंद्र रावत, त्रिलोकी सिंह इंटर कॉलेज-धर्मेन्द्र कुमार, लखनऊ मॉडल पब्लिक इंटर कॉलेज इंदिरानगर-प्रीति यादव, न्यू पब्लिक कॉलिजिएट-दुर्गा प्रसाद द्विवेदी, बाल निकेतन इंटर कॉलेज- प्रियांश, न्यू बाल भारती स्कूल-महेंद्र सिंह शाह, लखनऊ मॉडल पब्लिक स्कूल फरीदीपुर-शुचि तिवारी, एसडीएसएन पब्लिक स्कूल-पंकज वर्मा, वरदान इंटरनेशनल एकेडमी-प्रियंका खत्री, क्रिएटिव कॉन्वेंट इंटर कॉलेज, यूपी बोर्ड से अंकित भारद्वाज व सीबीएसईबोर्ड से संतोष शर्मा, लखनऊ इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल-विशाल द्विवेदी, जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल-ऋषभ मिश्रा, जीवन ज्योति एकेडमी-राजेंद्र राय, एलन हाउस पब्लिक स्कूल-प्रीति मदनानी, स्कॉलर्स होम-बृजेन्द्र सिंह, दिल्ली पब्लिक स्कूल, गोमतीनगर विस्तार- डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव, सेंट जोसेफ इंटर कॉलेज ठाकुरगंज पूजा बत्रा, दि मिलेनियम स्कूल फैजाबाद रोड-गीतिका सिंह, एसबीएन इंटर कॉलेज-आरएन सिंह, दिल्ली पब्लिक स्कूल एल्डिको-डॉ. गुंजन श्रीवास्तव, विश्वनाथ एकेडमी-आशु रंजन, प्रेरणा स्कूल-रीना मसीह, मां भगवती विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल-मो.फाजिल, जीजीआईसी गोमतीनगर-डॉ. गरिमा कुशवाहा, बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल-अखिलेश उपाध्याय, बाल निकुंज गर्ल्स एकेडमी बेलीगारद अलीगंज-नीरज वर्मा, लाला गणेश प्रसाद वर्मा बालिका इंटर कॉलेज- संगीता श्रीवास्तव।
शिक्षा में दीक्षा से ही नया भारत संभव
हॉर्नर कॉलेज की प्रिंसिपल व अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की सचिव डॉ. माला मेहरा ने शिक्षा में नवाचार को लेकर विशेष सत्र में दीक्षा एप और जीवन में दीक्षा संस्कार दोनों की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा में दीक्षा से ही नए भारत की परिकल्पना संभव है।