जांच कमेटी ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार जितेन्द्र सिंह नेगी और डिप्टी रजिस्ट्रार प्रेमचंद्र कुशवाह को जिम्मेदार ठहराया है। अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने बताया कि सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में अनियमितता के मामले में परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार जितेन्द्र सिंह नेगी और डिप्टी रजिस्ट्रार प्रेमचंद्र कुशवाह को निलंबित किया गया है। उन्होंने बताया कि परीक्षा के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद लखनऊ के 7 कर्मचारियों को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। पर्यवेक्षण कार्य में लापरवाही पर एससीइआरटी के सात अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
बीते डेढ़ वर्ष में प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा (68500 सहायक अध्यापक भर्ती लिखित परीक्षा) में उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन का कार्य लखनऊ में विधानसभा मार्ग स्थित मैंनेजमेंट कंट्रोल सिस्टम प्रा. लिमिटेड को दिया गया था। प्रभात कुमार ने बताया कि उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में लापरवाही और गड़बड़ी पर कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया है। मुख्यमंत्री ने कंपनी का कंपनी का भुगतान नहीं करने और कंपनी को सरकार के सभी विभागों, निगम, बोर्ड और आयोग में भी काम नहीं देने के निर्देश दिए।
बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने मुख्यमंत्री के समक्ष सभी 1 लाख 7 हजार अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका की स्क्रूटनी की रिपोर्ट पेश की। प्रभात कुमार ने बताया कि स्क्रूटनी में 343 कापियों में गड़बड़ी मिलने पर उनके परीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। स्क्रूटनी में 51 ऐसे अभ्यर्थी सामने आए हैं, जिन्हें परिणाम में फेल बताया गया था जबकि वह मेरिट में आ रहे हैं। इन सभी 51 अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 53 ऐसे अभ्यर्थी भी आए हैं जिन्हें परिणाम में सफल बताया गया है। जबकि वह स्क्रूटनी में फेल हुए हैं। ऐसे 53 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन कराया जाएगा। पुनर्मूल्यांकन के परिणाम के आधार पर उन्हें दी गई सहायक अध्यापक की नौकरी का भविष्य तय होगा।