लखनऊ। राजधानी में इलाज के लिए आई टीबी पीड़ित युवती पांच घंटे तक एक से दूसरे संस्थान भटकती रही। वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर थी। कई घंटे तक इलाज शुरू न होने से उसकी हालत गंभीर हो गई। बाद में परिजनों ने उसे बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया। परिजनों का कहना है कि किसी ने ऑक्सीजन पॉइंट की कमी तो कहीं आईसीयू की जरूरत बताकर उन्हें दूसरे अस्पताल का रास्ता दिखाया गया।
गोंडा के राजा मोहल्ला की रहने वाली ज्योति श्रीवास्तव (23) टीबी से ग्रस्त हैं। सोमवार सुबह परिजन पहले उन्हें गोंडा के जिला अस्पताल ले गए। वहां से उन्हें केजीएमयू रेफर किया गया। सुबह करीब नौ बजे परिजन ज्योति को लेकर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, मगर वहां काफी देर तक इंतजार के बाद जूनियर डॉक्टरों ने ऑक्सीजन पॉइंट खाली न होने की बात कहकर ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय रेफर कर दिया।
इसके बाद परिजन एंबुलेंस से ज्योति को ठाकुरगंज अस्पताल ले गए, मगर यहां डॉक्टरों ने आईसीयू की जरूरत बताकर बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। दोपहर करीब दो बजे वे बलरामपुर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने ज्योति की गंभीर हालत को देखते हुए इमरजेंसी में भर्ती किया। वह अभी ऑक्सीजन सपोर्ट पर है।
इधर, ट्रॉमा प्रभारी डॉ. प्रेमराज का कहना है कि ऑक्सीजन पॉइंट खाली न होने का आरोप गलत है। अगर परिजन शिकायत करते हैं तो जांच कराई जाएगी।