लखनऊ। 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान के आंकड़ों से पता चला है कि टीबी का उपचार नहीं, बल्कि समय पर मरीजों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती है। अभियान के दौरान 2.8 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 9,370 नए मरीजों की पुष्टि हुई। सभी को निशुल्क उपचार से जोड़ा गया है।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि टीबी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। कई लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता है। सक्रिय टीबी खोज अभियान संक्रमण की शृंखला तोड़ने में महत्वपूर्ण है। अभियान में 3,560 ऐसे मरीजों की भी पहचान हुई, जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल ने बताया कि अभियान के तहत 301 आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाए गए। 1,924 निक्षय मित्रों ने 7,800 टीबी मरीजों को गोद लेकर पोषण पोटली उपलब्ध कराई। जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी योगेश रघुवंशी ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है। जनप्रतिनिधियों, निक्षय मित्रों और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से ही टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।