उत्तर प्रदेश में करीब 38 लाख करोड़ के एमओयू के बाद उन्हें जमीन पर उतारकर उत्पादन शुरू करने के लिए पहली बार समयबद्ध टारगेट दिया गया है। यूपी में 24000 से ज्यादा निवेश प्रस्ताव आए हैं। इन्वेस्ट यूपी के 40 अकाउंट्स मैनेजरों को 100-100 एमओयू धरातल पर उतारने का टारगेट दिया गया है जो 100 करोड़ से ऊपर के हैं। वहीं 100 करोड़ से कम 19500 एमओयू को इकाई में बदलने के लिए उद्यमी मित्रों और जीएम- डीआईसी को जिम्मा दिया गया है। सभी को सात तिमाही के अंदर एमओयू को उत्पादन इकाई में तब्दील करने का लक्ष्य दिया गया है।
प्रदेश सरकार अब निवेश प्रबंधन को कॉर्पोरेट-स्टाइल अकाउंट मैनेजमेंट मॉडल में तब्दील कर रही है। इसके माध्यम से प्रत्येक निवेश लीड पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके तहत उद्यमी मित्रों से लेकर इन्वेस्ट यूपी के सीईओ तक का लक्ष्य तय किया गया है। जवाबदेही की ये कार्ययोजना सीईओ विजय किरण आनंद ने बनाई है। शीर्ष 200 एमओयू को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी खुद सीईओ और एसीईओ ने उठाई है। साथ ही ये भी कहा गया है कि 26 दिसंबर तक सभी एमओयू को उत्पादन या भूमि पूजन समारोह के लिए तैयार कर लिया जाए।
हर महीने 10 लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने का लक्ष्य
प्रत्येक निवेश एमओयू के लिए एक रिलेशनशिप मैनेजर को भी नियुक्त किया गया है, जो लीड की जरूरतों, चुनौतियों और प्रगति की नियमित निगरानी करता है। निवेश लीड्स के नए स्रोतों के निर्माण के लिए बहु स्तरीय रणनीति पर काम किया जा रहा है। फॉर्च्यून इंडिया 1000, फॉर्च्यून 500 इंडिया और नेक्स्ट 500 की सूची में शामिल 814 कंपनियों को व्यक्तिगत अकाउंट मैनेजरों को सौंपा गया है।
इसके अतिरिक्त चीन+1 रणनीति के तहत यूएसए (31), जर्मनी (17), जापान (21), चीन (14), फ्रांस, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, यूके और स्पेन जैसी देशों की कंपनियों से संपर्क साधा गया है। यूपी सरकार इन देशों में स्थित भारतीय दूतावासों के माध्यम से प्रत्यक्ष निवेश संवाद भी स्थापित कर रही है। भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत स्वीकृत 574 परियोजनाओं में से 70 प्रोजेक्ट्स उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं। विनिर्माण क्षेत्र में सरकार ने हर महीने 10 लेटर ऑफ कंफर्ट (एलओसी) जारी करने का लक्ष्य रखा है।