पुलिस महकमे की सिपाही भर्ती परीक्षा के आवेदन में भूलवश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का आश्रित दर्ज करने वाले एक अभ्यर्थी के मामले में अधिकारियों को दो सप्ताह में निर्णय लेना होगा। न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन ने यह आदेश रवींद्र कुमार यादव की याचिका पर दिया।
याचिका में क हा गया कि याची ने भूलवश आवेदन में खुद को ओबीसी कोटे के बजाय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित कोटे में दर्ज कर दिया था। परीक्षा के विभिन्न चरणों में वह सफल रहा, पर गलत खाने में टिक किए जाने की वजह से उसे मेडिकल परीक्षण के लिए नहीं बुलाया गया। याची ने अदालत से गुजारिश की थी कि उसे मेडिकल परीक्षा में शामिल किए जाने के निर्देश दिए जाएं।
याची के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के पूर्व में ऐसे ही एक अन्य मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए अदालत से याची को भी उसी आलोक में लाभ दिए जाने की दलील दी। इस पर अदालत ने याची को अधिकारियों से समक्ष एक सप्ताह में प्रत्यावेदन देने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि याची का प्रत्यावेदन मिलने के दो सप्ताह में अधिकारी इस मामले में फैसला करें। कोर्ट ने ताकीद की कि यह फैसला समान मामले में अदालत के पूर्व आदेश के आलोक में नियम व कानून के तहत किया जाए।