इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) के वांछित कमांडर तहसीन अख्तर उर्फ मोनू की गिरफ्तारी के साथ ही यूपी समेत कई अन्य राज्यों में हुई आतंकी वारदात के रहस्य खुलने लगे हैं।
एटीएस भी तहसीन से पूछताछ करना चाहती है, इसके लिए दिल्ली क्राइम ब्रांच से समय मांगा जाएगा।
वहीं सूत्रों का कहना है कि वाराणसी के शीतलाघाट विस्फोट मामले में एटीएस तहसीन व वकास को रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहती है।
इसके लिए एटीएस विधिक कार्यवाही करेगी। खुफिया एजेंसियों को तहसीन की वाराणसी, पटना और हैदराबाद विस्फोट में तलाश थी।
आईएम के निशाने पर भाजपा के पीएम प्रत्याशी नेता नरेंद्र मोदी के होने की तस्दीक कर चुकी खुफिया एज़ेंसियों को यह भी जानकारी मिल चुकी है कि तहसीन ने खुद और अपने अन्य साथियों की मदद से मोदी की कानपुर, वाराणसी और लखनऊ रैली के लिए रेकी कराई थी।
इसके अलावा गोरखपुर और कानपुर में भी रेकी कराई गई। आईएम के वकास को पकड़े जाने के बाद हुई पूछताछ में भी इस बात के संकेत मिले हैं कि तहसीन किसी बड़े काम को अंजाम देने की तैयारी में था।
गौरतलब है कि वाराणसी के शीतलाघाट विस्फोट से पहले एक विदेशी पर्यटक के शूट किए गए वीडियो में जिस युवक को बैग लेकर जाते और खाली हाथ लौटते देखा गया था, उसके तहसीन होने की पुष्टि पहले ही हो चुकी है।
जांच में यह भी सामने आ चुका है कि तहसीन के इशारे पर रेकी करने वाले शेख मुजीब व मोहम्मद आलम उससे मिलने नेपाल गया था।
जांच में पता चला है कि अयोध्या मामले में फैसला आने के फौरन बाद ही फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों को आईएम ने निशाने पर ले लिया था।
इसके लिए आईएम कमांडर तहसीन उर्फ मोनू के इशारे पर आईएम के दो सदस्यों ने लखनऊ में रेकी की थी। यह वही सदस्य हैं जो खंडवा में पुलिस हिरासत से भाग निकलने में सफल रहे थे।