दो साल के लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को सदर तहसील में घड़ी की सुई के दस बजाते ही काले रंग की एंबेस्डर कार के प्रवेश के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
पीड़ितों की फरियाद सुनने के लिए खुद नवनियुक्त जिलाधिकारी राजशेखर, सीडीओ व एसडीएम के साथ तहसील दिवस सभागार में पहुंचे थे। नए हाकिम के तहसील दिवस में पहुंचने से वहां मौजूद गिनती के अधिकारी सकते में आ गए।
डीएम ने सभागार में एक निगाह डालने के बाद सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को अगले पंद्रह मिनट में तहसील दिवस में उपस्थित होने का फरमान सुनाया।
इसके बाद 15 से 20 मिनट में तहसील दिवस में अपनी जगह मातहत कर्मियों को भेजने वाले जिला स्तरीय अधिकारियों के तहसील आने का सिलसिला शुरू हो गया।
जिलाधिकारी राजशेखर ने तहसील दिवस को हाशिए पर रखने वाले अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कार्रवाई का चाबुक चलाया।
उन्होंने तहसील दिवस में अनुपस्थित रहने, देरी से आने व अधीनस्थों को भेजने के आरोप में 19 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब न आने तक वेतन रोकने का निर्देश जारी किया।
अनुराग यादव के हटने के बाद कार्यभार संभालने वाले डीएम राजशेखर की कार्रवाई से तहसील सहित कलेक्ट्रेट कार्यालय में हड़कंप रहा।
वे खुद तहसील दिवस में पांच घंटे मौजूद रहे व शिकायतें सुनीं। जिलाधिकारी ने साफ किया कि इस तहसील दिवस में आने वाले आवेदन पत्रों के निस्तारण 25 फरवरी तक जरूर कर दिए जाएं।
इनके निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर बिना नोटिस कार्रवाई होगी।