अगर आप ज्यादा मोटे हैं, धूम्रपान करते हैं, मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर की चपेट में हैं या 50 साल की उम्र पार चुके हैं तो गुर्दे की बीमारी की जोखिम की श्रेणी में हैं।
गुर्दा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोगों को छह माह में एक बार गुर्दे की क्रियाशीलता की जांच जरूर कराना चाहिए।
गुर्दे की बीमारी का पता खून में सीरम क्रिएटनिन और पेशाब में एल्ब्यूमीन की जांच से शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है।
वह भी अधिकतम 50 रुपये खर्च कर। अगर आप अपने गुर्दे को सुरक्षित रखते हैं तो आपका दिल भी सुरक्षित रहता है।
डॉक्टर्स का कहना है, गुर्दे 90 फीसदी खराब नहीं हो जाते उसके लक्षण नहीं दिखते। अगर वक्त रहते गुर्दे की खराबी का पता लग जाए तो इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
पहचानिए लक्षण
भूख न लगना, लगातार उल्टी, जी मितलाना, पेशाब कम होना, पेशाब में खून आना, दर्द के साथ पेशाब का होना, चेहरे और आंख की नीचे सूजन एवं शरीर में खून की कमी, सांस फूलना।
ऐसे बचा सकते हैं गुर्दा
उच्च रक्तचाप, मधुमेह पर नियंत्रण, शरीर का वजन कम करना, व्यायाम करना, खानपान नियंत्रित रखना
क्या करता है गुर्दा
- शरीर में द्रव का संतुलन बनाए रखना
- सोडियम, फास्फोरस और पोटैशियम की मात्रा नियंत्रित रखना
- रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए हारमोन का स्राव
- विटामिन डी क्रियाशील रखने के लिए हारमोन का स्राव
- खून के विषाक्त तत्वों को छान कर अलग करना