लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी स्वप्निल सिन्हा को भारत सरकार से कॉपीराइट पंजीकरण प्रदान किया गया है। उन्हें यह कॉपीराइट उनकी ‘इमोशनल फर्वर साइकिल’ नामक वैचारिक रूपरेखा के लिए मिला है। यह रूपरेखा मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों में बर्नआउट और भावनात्मक श्रम को समझने में सहायक होगी। यह अवधारणा मनोविज्ञान विभाग में स्वप्निल सिन्हा के डॉक्टोरल शोध का हिस्सा है। उन्होंने यह शोध पर्यवेक्षक प्रो. सुप्रिया चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में किया है।
स्वप्निल सिन्हा ने बताया कि थीसिस जनवरी 2026 में विवि में जमा की जा चुकी है। इस कॉपीराइट प्राप्त रूपरेखा को स्वप्निल सिन्हा, प्रो. सुप्रिया चतुर्वेदी और सक्षम शुक्ला ने मिलकर विकसित किया है। उन्होंने बताया कि यह मॉडल बताता है कि बर्नआउट को समय रहते पहचाना और प्रभावी हस्तक्षेपों के माध्यम से रोका जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर अक्सर तनाव, भावनात्मक थकान और बर्नआउट का सामना करते हैं। उन्होंने बताया कि अत्यधिक या लंबे समय तक चलने वाले तनाव (विशेष रूप से कार्यस्थल पर) के कारण उत्पन्न होने वाली शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक थकावट की स्थिति है। इसमें व्यक्ति खुद को ऊर्जाहीन, निराश और काम के प्रति नकारात्मकता महसूस करता है। भारत में प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी के कारण उनका कल्याण एक गंभीर जनस्वास्थ्य चिंता का विषय है। स्वप्निल सिन्हा ने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी शोध-पर्यवेक्षक प्रो. सुप्रिया चतुर्वेदी को दिया। उन्होंने विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना शुक्ला और सह-लेखक सक्षम शुक्ला के प्रति भी आभार व्यक्त किया।