500 वर्ष बाद बुधवार को शुभ योग में रामलला एक हजार करोड़ रुपये से निर्मित भव्य महल में अपना जन्मदिन मनाएंगे। सूर्यवंशी भगवान राम के मस्तक पर दोपहर 12:16 बजे स्वयं भगवान सूर्य की किरणें उनका तिलक करेंगी। यह विज्ञान और इंजीनियरिंग के अदभुत प्रयोग से सफल होगा। इसके लिए वैज्ञानिकों ने कई महीनों की साधना की। कई सारे प्रयोग किए।
चार मिनट तक बना रहेगा टीका
वैज्ञानिकों ने बीते 20 वर्षों में अयोध्या के आकाश में सूर्य की गति अध्ययन किया है। सटीक दिशा आदि का निर्धारण करके मंदिर के ऊपरी तल पर रिफ्लेक्टर और लेंस स्थापित किया है। सूर्य रश्मियों को घुमा फिराकर रामलला के ललाट तक पहुंचाया जाएगा। सूर्य की किरणें ऊपरी तल के लेंस पर पड़ेंगी। उसके बाद तीन लेंस से होती हुई दूसरे तल के मिरर पर आएंगी। अंत में सूर्य की किरणें रामलला के ललाट पर 75 मिलीमीटर के टीके के रूप में दैदीप्तिमान होंगी। लगभग चार मिनट तक टिकी रहेंगी। यह समय भी सूर्य की गति और दिशा पर निर्भर है।