सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश में टीचर इलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियुक्त किए गए करीब 66 हजार शिक्षकों के मामले में किसी तरह का दखल देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ये शिक्षक अध्यापन का काम करते रहेंगे।
हालांकि नई भर्तियों (करीब छह हजार) के लिए क्या मानक या योग्ताएं होंगी, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश सरकार को कुल 72,825 शिक्षकों की भर्ती करनी है। उधर, शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक बनाने जाने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट दो मई को सुनवाई करेगी।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा कि टीईटी और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर भर्ती किए गए करीब 66 हजार शिक्षक अपना काम करते रहेंगे। साथ ही पीठ ने बाकी बचे पदों पर भर्तियों के लिए मानक और योग्यता के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मालूम हो कि टीईटी पास उम्मीदवार टीईटी के साथ शैक्षणिक योग्यता जोड़ने के नियम (यूपी बेसिक शिक्षा नियम-13 और 15) का विरोध कर रहे हैं।
यूपी सरकार ने नियम बनाया था कि सिर्फ टीईटी के आधार पर शिक्षकों की भर्ती नहीं होगी। नियुक्ति में शैक्षणिक योग्यता पर भी गौर किया जाएगा। सरकार ने इन दोनों आधार पर मेरिट लिस्ट बनाने का निर्णय लिया था। सरकार के इस नियम को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यूपी सरकार को इस तरह का नियम बनाने का कोई अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले को यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। वहीं, कुछ छात्रों ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
वहीं टीईटी पास छात्रों ने दलील दी है कि सरकार ने जब 72,825 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन निकाला था तब सिर्फ टीईटी पास योग्यता रखी गई थी, लेकिन बाद में शैक्षणिक योग्यता को भी जोड़ दिया गया, जो सरासर गलत है।