इस विरोध का मूल कारण है, भाजपा के एक विधायक द्वारा शोषित-वंचित समाज की एक सम्मानित भूतपूर्व महिला मुख्यमंत्री का सरेआम किया गया अपमान। हालांकि, मायावती एक ओर अखिलेश यादव का आभार व्यक्त कर रहीं थीं, तो दूसरी ओर दलितों के कोटे में कोटे पर सपा प्रमुख की चुप्पी पर सवाल भी खड़ा कर रही थीं।
राजनीति के जानकार मानते हैं कि बसपा का आधार वोटर पिछले लोकसभा और उससे पहले विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से निराश है। सपा को उम्मीद है कि ये वोटर उसकी ओर रुख कर सकता है। भले ही लोकसभा चुनाव में बसपा ने कोई सीट न जीती हो, पर यूपी में उसे 9 प्रतिशत से ज्यादा मत मिले थे।
सपा नेतृत्व अच्छी तरह से जानता है कि मायावती को सम्मान देने पर ही यह आधार वोट उन्हें मिल सकता है। बशर्ते बसपा से हमदर्दी रखने वाले मतदाताओं को यह महसूस हो कि उनकी पार्टी का प्रत्याशी जिताऊ स्थिति में नहीं है। यही वजह है कि एक खास रणनीति के तहत अखिलेश यादव, मायावती के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं। उपचुनाव में इसका लिटमस टेस्ट भी हो जाएगा।