उत्तर प्रदेश के अलग-अलग विभागों में अफसरों के अलग ही कारनामे चर्चा में रहते हैं। एक विभाग के अधिकारी तो अपने काम से ज्यादा जून के आने के इंतजार में समय बिता रहे हैं। वहीं, जड़ी-बूटी वाले विभाग के अधिकारी की सक्रियता बड़ी चर्चा में है। उद्योगों के विकास वाले अफसर तो एक-दूसरे के पीछे पड़े हैं।
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अभी समय सही नहीं चल रहा
प्रदेश में पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के हाल बड़े अजीब हैं। विभाग के तीसरे तल पर स्थित कार्यालयों में इन दिनों अजीब सी बेचैनी है। यहां के अधिकारियों का मन अपने काम से ज्यादा जून के इंतजार में बीत रहा है। कुछ सेवानिवृत्त होने वाले हैं तो कुछ यहां से हटने की हर जुगत लगा रहे हैं। ऐसे में विभाग के ही एक अधिकारी को ऊंचे पद पर आने का प्रस्ताव दिया गया तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया कि आएंगे तो अभी वहां समय सही नहीं चल रहा है। पहले वहां के हालात तो सही हो जाएं, फिर सोचते हैं।
जड़ी बूटी वाले साहब का कमाल
आयुर्वेद विभाग में राजधानी में आए नए अफसर की तेजी से पूरा कार्यालय परेशान है। ज्यादातर दिन ऑफिस से गायब रहने वाला यह अधिकारी जिस दिन कार्यालय पहुंचते हैं उसी दिन उन्हें हर तरह का विवरण चाहिए। उन्होंने 15 अप्रैल को दोपहर एक बजे एक पत्र जारी करके तबादले से संबंधित जानकारी उसी दिन शाम पांच बजे तक मांगते हैं। उनकी यह तेजी चर्चा का विषय बनी हुई है। कहा तो यह भी जा रहा है कि वह अभी से तबादला सूची बनाने में जुट गए हैं। इसमें अस्पताल के हिसाब से दर भी तय कर दी हैं। अब देखना यह है कि निर्धारित की गई दरें लागू हो पाती हैं या नहीं।
उसकी कमीज मेरी से सफेद कैसे
उद्योगों के विकास का जिम्मा प्रदेश के कई प्राधिकरणों के पास है। ये पूरब से लेकर पश्चिम तक फैले हैं। नए धन्नासेठों को लाने की होड़ यूं तो सभी के बीच है लेकिन तीन प्राधिकरणों के बीच प्रतिस्पर्धा कुछ ज्यादा ही है। मूंछ की लड़ाई इस बात को लेकर है कि कितनी फैक्टरियां जमीन पर उतारी गईं। अब अपने से ज्यादा दूसरों की कलई खोलने की होड़ इन तीनों में मची है। अपना काम कितना किया, इसका बखान करने से ज्यादा अगले की बखिया उधाड़ने में पसीना बहाया जा रहा है।
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