लखनऊ के अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई और अब मामले पर मिट्टी डालने के लिए बकरों की तलाश तेज हो गई है। जो बड़े जिम्मेदार हैं वो इस बार भी बच जाएंगे। वहीं, राम मंदिर से जुड़ा शख्स जो चंदा चोरी में सबके निशाने पर है फिर सामने आने लगा है। चर्चा है कि उसे आखिर कहां से संजीवनी मिल रही है। चर्चा में हैं ये किस्से:
आग का क्या, फिर भड़केगी
आग में जले मासूम छात्र-छात्राओं के परिजनों के आंसू थमे भी नहीं थे कि पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने की पुरानी चालबाजी शुरू हो गई। आनन-फानन बलि के बकरों की तलाश तेज हो गई। उन पर तत्काल कार्रवाई भी हो गई लेकिन जिनका दोष ही नहीं था, उनकी आवाज नहीं दबा सके। मुंह खुलते ही बुझी आग फिर भड़क गई और उसका धुआं उन अफसरों को घेरने लगा जिन्होंने दोषियों के नाम आगे किए थे। किसी तरह बागियों को चुप तो करा दिया गया लेकिन आग का क्या, वो तो फिर भड़क सकती है।
तबादलों का फेर
पश्चिम वाले मंत्रीजी ने पिछले साल अपने विभाग में कार्मिकों के तबादलों के लिए पूरा जोर लगाया लेकिन एक को भी हिला नहीं पाए। पूरा सत्र शून्य हो गया। इस बार बाकी लोग पूरा जोर लगाए हैं कि ज्यादा से ज्यादा तबादले हो जाएं लेकिन मंत्रीजी हैं कि फाइल को रफ्तार देने में रुचि ही नहीं ले रहे हैं। अब तो चर्चा है कि मंत्रीजी पिछले साल का बदला ले रहे हैं... तब मेरी नहीं चली, अब बाकियों की नहीं चलने दूंगा।
कहीं से तो मिल रही संजीवनी
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला चर्चा में है। मंदिर से जुड़े एक सबसे अहम शख्स रडार पर हैं। मामला जब गर्माया था, तब उन्होंने चुप्पी साध ली थी। यहां तक कि दर्शन भी दुर्लभ थे। अब जब एसआईटी की पहले दौर की तफ्तीश पूरी हो गई है तो वह सामने आए हैं। मीडिया से सीधी बातचीत तो नहीं की लेकिन एक कार्यक्रम में शिरकत की। भाषण आत्मविश्वास से भरा था। इससे साफ पता चल रहा है कि कहीं से तो उन्हें संजीवनी मिल रही है। इसलिए भाषण में बेफिक्री दिखी। देखना होगा कि संजीवनी कब तक काम आती है?
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