सुना है क्या... कॉलम में हम यूपी के सियासी और प्रशासनिक गलियारों की उन कानाफूसी का जिक्र करते हैं जो कि काफी छिपाने के बाद भी बाहर आ ही जाती हैं और बताती है कि अंदर चल क्या रहा है? आज हम प्रदेश सरकार के तीन विभागों की बात कर रहे हैं। पढ़ें, आज की कानाफूसी
सुना है क्या... कॉलम में हम यूपी के सियासी और प्रशासनिक गलियारों की उन कानाफूसी का जिक्र करते हैं जो कि काफी छिपाने के बाद भी बाहर आ ही जाती हैं और बताती है कि अंदर चल क्या रहा है? आज हम प्रदेश सरकार के तीन विभागों की बात कर रहे हैं। पढ़ें, आज की कानाफूसी
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जिम्मेदारों को बचाने की पैंतरेबाजी
फल-सब्जी वाले विभाग में बड़ा घोटाला हो गया। बीज जहां पहुंचना चाहिए था, वहां से कहीं और पहुंच गया। बाकायदा जांच हुई, उसमें भी खेल हो गया। जिम्मेदारों के बहाने कुछ ऐसे लोगों को भी किनारे कर दिया गया, जो भविष्य में मनचाहे काम में कांटा बन सकते थे। ऐसे में अब विभाग में चर्चा ए आम है कि कांटा बनने की कोशिश की तो कहीं भी लपेट दिए जाएंगे। इस पैंतरेबाजी ने विभागीय अधिकारियों को अलर्ट कर दिया है।
यहां फिर हो गया खेला
गरीब और कुशल कामगारों के नाम पर फिर खेल कर दिया गया। उन्हें फ्री में दिए जाने वाले उपकरणों में विभाग के ही अफसरों ने अपने चाहने वालों पर तो कृपा बरसानी शुरू कर दी। वह भी तब जब इसी कृपा के चक्कर में एक बार पूरी प्रक्रिया को निरस्त किया जा चुका था। छोटे कामगारों से जुड़े विभाग में नियम किनारे रखकर अपना रास्ता 'क्लियर' कर लिया है। विभागीय सूत्र का कहना है कि देखो भैया, बिल्ली के मुंह में खून लगा हुआ है इसलिए सूखे सूखे कुछ होगा नहीं।
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तेजी से चल रही फाइल
प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले एक विभाग में कुछ कामकाज बिल्कुल ही उलट होते हैं। अब यही देख लीजिए कि आम तौर पर किसी विभाग के आला अफसर नहीं होते हैं तो वहां का कामकाज प्रभावित होता है। किंतु विभाग में इस समय दो प्रमुख आला अफसर नहीं हैं। किंतु इसका असर कामकाज प्रभावित होने की जगह काम की सुगमता पर पड़ा है। एक अधिकारी ने चुटकी लेते हुए कहा कि इस समय फाइलें बहुत तेजी से चल रही हैं। बीच के अफसरों के न होने पर बड़े साहब के पास फाइलें जा रही हैं और वे काफी तेजी से कामकाज का निस्तारण कर रहे हैं।