अपनी धमाकेदार जीत के बाद शैलेंद्र प्रताप सिंह जिले में एमएलसी पद के पर्याय सरीखे बन गए हैं। मौजूदा चुनाव में भी उनकी धमक कायम रही। पांचवीं बार एमएलसी निर्वाचित होने के बाद एक बार फिर यह साबित हो गया कि पंचायत प्रतिनिधियों के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। उनकी जीत ने भाजपा को भी इतराने का मौका दे दिया है। सुल्तानपुर-अमेठी एमएलसी चुनाव में भाजपा को पहली बार जीत हासिल हुई है।
शैलेंद्र प्रताप सिंह ने 1990 में अपना सियासी सफर शुरू किया था। उन्होंने जनता दल के टिकट से एमएलसी का चुनाव लड़ा और जीतकर विधान परिषद पहुंचे। 1996 में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी वे फिर एमएलसी के चुुनाव में उतरे। चुनाव में उन्हें जीत मिली। 2003 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर एमएलसी का चुनाव लड़ा और हैट्रिक लगाई। 2010 में वे समाजवादी पार्टी के टिकट पर फिर मैदान में उतरे लेकिन उन्हें पूर्व मंत्री विनोद सिंह के अनुज अशोक कुमार सिंह से शिकस्त मिली। 2016 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा।
इस चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई। 2022 का चुनाव एक बार फिर जीतकर उन्होंने अपनी धमक कायम रखी है। 2022 के चुनाव को लेकर करीब तीन महीने पहले तक संशय की स्थिति बनी थी। उसकी वजह भी अनायास नहीं थी। पूर्व मंत्री विनोद सिंह भाजपा से विधान परिषद चुनाव लड़ने की तैयारियों में लगे थे। 2010 के चुनाव में शैलेंद्र प्रताप सिंह को मिली एकमात्र शिकस्त के नायक भी वही थे। तब विनोद सिंह के अनुज अशोक कुमार सिंह ने उन्हें चुनाव हरा दिया था। माना जा रहा था कि अगर पूर्व मंत्री विनोद सिंह भाजपा और शैलेंद्र प्रताप सिंह सपा के टिकट पर आमने-सामने हुए तब संघर्ष कांटे का हो जाएगा। इन्हीं अंदेशों के बीच शैलेंद्र प्रताप सिंह ने भाजपा ज्वॉइन कर एक झटके में बाजी ही पलट दी।
बदली राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा को पूर्व मंत्री विनोद सिंह को विधानसभा चुनाव में उतारना पड़ा। चुनाव जीतकर विनोद सिंह विधायक बन गए। वहीं, शैलेंद्र प्रताप सिंह के रूप में भाजपा ने विधानसभा सीट भी फतह कर ली। सु्ल्तानपुर-अमेठी एमएलसी चुनाव में यह भाजपा की पहली जीत है। लगातार छह चुनाव लडकऱ पांच में जीत हासिल करने वाले शैलेंद्र प्रताप सिंह सुल्तानपुर-अमेठी में एमएलसी पद के पर्याय सरीखे बन गए हैं। एमएलसी शब्द जुबान पर आते ही लोगों के जेहन में शैलेंद्र प्रताप सिंह का अक्स उभर आता है।