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घाटे में गन्ना किसान, शुगर लॉबी की बल्ले-बल्ले

Thu, 13 Nov 2014 12:20 AM IST
राजेंद्र सिंह/ अमर उजाला, लखनऊ
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गन्ना मूल्य निर्धारण से लगातार दूसरे साल किसानों को मायूसी हाथ लगी है। प्रदेश सरकार ने रियायतों का पिटारा खोलकर शुगर लॉबी की बल्ले-बल्ले कर दी लेकिन गन्ना उत्पादक किसान घाटे में रह गए। उन्हें केवल गन्ना मूल्य वृद्धि न होने से ही नुकसान नहीं है बल्कि गन्ना मूल्य की जिस प्रक्रिया को कैबिनेट ने मंजूरी दी है, उसकी मार भी किसानों पर ही पड़ेगी।
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उन्हें न केवल पहली किस्त में पिछले साल से कम गन्ना मूल्य मिलेगा वरन दूसरी किस्त के लिए पेराई समाप्त होने के तीन माह बाद तक इंतजार करना होगा।

पेराई सत्र 2013-14 में तंगहाली से जूझे किसानों के लिए प्रदेश सरकार ने सत्र 2014-15 के लिए गन्ना मूल्य पिछले साल के बराबर रखा है। किसानों की पीड़ा है कि बीते पेराई सत्र में गन्ना मूल्य काफी देरी से और कई टुकड़ों में मिला, जिससे वे समय से अपनी घरेलू जरूरतें भी पूरी नहीं कर सके।

पहली बार गन्ना किसानों की आत्महत्याओं की खबरें आईं। ‘संकट’ से जूझते चीनी उद्योग पर तो सरकार मेहरबान रही लेकिन कर्ज व बदहाली की मार झेल रहे किसानों के प्रति उसका रुख उपेक्षापूर्ण ही रहा।
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पहली किस्त में 20 रुपये कम मिलेंगे

लगभग एक साल पहले मुख्य सचिव ने चीनी मिलों को पैकेज देने की घोषणा के समय पहली बार किसानों को दो किस्तों में गन्ना भुगतान की व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा था कि चीनी मिल किसानों को 260 रुपये मूल्य गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर देंगे और 20 रुपये पेराई सत्र के बाद।

बुधवार को चालू पेराई सत्र के गन्ना मूल्य की जानकारी देते हुए प्रमुख सचिव गन्ना एवं चीनी उद्योग राहुल भटनागर ने इस व्यवस्था को दोहराया तो यह किसानों के लिए थोड़ा कड़वापन लिए थी। उन्होंने कहा कि किसानों को पहली किस्त के रूप में 14 दिन के भीतर 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्य मिलेगा। यानी किसानों को पहली किस्त में ही 20 रुपये कम कर दिए गए।

दूसरी किस्त के लिए कीजिए लंबा इंतजार
शुगर केन परचेड एक्ट में 14 दिन के बाद गन्ना मूल्य भुगतान पर ब्याज की व्यवस्था है। इसके बावजूद सरकार ने चीनी मिलों को गन्ना मूल्य की दूसरी किस्त अदा करने के लिए तीन महीने का वक्त दे दिया।

पिछले साल के विपरीत प्रमुख सचिव ने कहा कि दूसरी किस्त के रूप में 40 रुपये गन्ना मूल्य पेराई बंद होने के तीन माह के भीतर दिया जाएगा। यानी दूसरे किस्त के लिए किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
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शुगर इंडस्ट्री नहीं मानती आदेश

शुगर इंडस्ट्री के लिए सरकार के आदेशों के मायने नहीं है। मुख्य सचिव ने पिछले साल 260 रुपये गन्ना मूल्य 14 दिन के भीतर भुगतान कराने की घोषणा की थी। यह भी कहा था कि भुगतान में देरी होने पर नियमानुसार ब्याज देय होगा। एक भी मिल ने तय समय में पहली किस्त के रूप में 260 रुपये गन्ना मूल्य नहीं दिया। पेराई सत्र समाप्त हुआ तो किसानों का दस हजार करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया था।

नहीं मिला किसानों को ब्याज
किसान नेता वीएम सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट ने 31 अक्तूबर 2014 तक ब्याज समेत पूर्ण गन्ना मूल्य भुगतान कराने के आदेश दिए थे लेकिन ब्याज तो दूर किसानों को गन्ना मूल्य भी नहीं मिल पाया। अभी भी किसानों का चीनी मिलों पर पिछले पेराई सत्र का 1,850 करोड़ रुपये बकाया है। प्रमुख सचिव राहुल भटनागर का कहना है कि ब्याज का मुद्दा गन्ना आयुक्त द्वारा बनाई गई कमेटी के पास विचाराधीन है। उसकी सिफारिश के बाद विचार किया जाएगा।

मूल्य निर्धारण प्रक्रिया पर सवाल
किसान नेता गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) तय करने की प्रक्रिया पर ही सवाल उठा रहे हैं। सहकारी गन्ना समितियों के अध्यक्षों के संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. अरविंद कुमार सिंह कहते हैं कि गन्ना मूल्य निर्धारण से पहले किसानों और सरकारी शोध संस्थानों से गन्ना लागत के आंकड़े लिए जाते हैं। लेकिन अब इसकी अनदेखी की जा रही है।

गन्ना शोघ परिषद शाहजहांपुर के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ही पिछले दो सालों में गन्ना लागत में प्रति क्विंटल 25 रुपये की वृद्धि की हुई है। इसके बावजूद रेट नहीं बढ़ाया गया।
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