लखनऊ। विकासनगर के सेक्टर-3 निवासी 75 वर्षीय ऊषा शुक्ला को डिजिटल अरेस्ट करने वाले साइबर अपराधियों ने इतना डरा दिया था कि वह किसी से बात करने के लिए तैयार नहीं थीं। उन्हें भरोसे में लेने के लिए बैंक मैनेजर श्रवण सिंह राठौर ने मामा चौराहा चौकी प्रभारी शिव सिंह यादव को सूचना दी।
दरोगा साथी पुलिसकर्मियों के साथ बैंक पहुंचे। ऊषा इतनी खौफजदा थीं कि पुलिस को देखकर भी घबराने लगीं। काफी देर तक समझाने के बाद वह सामान्य हुईं। ठगों ने ऊष के बेटे को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी। साथ ही उन पर मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त होने का भी आरोप लगाया था।
एसीपी गाजीपुर ए. विक्रम सिंह ने बताया कि ऊषा शुक्ला बेटे-बहू के साथ रहती हैं। उनके पति एसके शुक्ला लोक निर्माण विभाग में कार्यरत थे, जिनका देहांत हो चुका है। छानबीन में सामने आया है कि ठगों ने ऊषा से दो करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा था। जालसाजों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि जांच में निर्दोष पाए जाने पर सारी रकम वापस कर दी जाएगी।
इसके बाद ऊषा शुक्ला से उनके चारों बैंक खातों की जानकारी लेने के बाद आधार कार्ड भी व्हाट्सएप पर मंगवा लिया था। चौकी प्रभारी शिव सिंह यादव ने बताया कि एहतियातन महिला के सभी खाते फ्रीज करा दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह का लेनदेन न हो सके। महिला ने थाने में कोई शिकायत नहीं की है।
अन्य बैंकों के भी खाते भी करवाए फ्रीज
पूछताछ में ऊषा ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में भी उनके खाते हैं, जिनकी जानकारी ठगों को है। इसके बाद ऊषा के साथ बैंककर्मी और पुलिस सभी बैंकों में गई और खातों को फ्रीज करवाया। बैंक के मंडल प्रमुख राज कुमार सिंह ने शाखा कार्यालय के सभी कर्मचारियों व अधिकारियों की सराहना की और उन्हें पुरस्कृत भी किया। बैंक प्रबंधक श्रवण सिंह राठौर ने बताया कि महिला शुरू में किसी की बात सुनने के लिए तैयार नहीं थीं। उन्हें समझाने में काफी समय लगा। बैंक की पूरी टीम के सहयोग से उन्हें ठगी से बचा लिया गया।