लखनऊ। पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में गंभीर फेफड़ों और दिल की बीमारी से जूझ रही 45 वर्षीय महिला की टूटी जांघ की हड्डी का सफल ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, सर्जरी के दौरान महिला की जान को करीब 20 प्रतिशत तक खतरा था। कई अस्पतालों ने जोखिम को देखते हुए सर्जरी से इन्कार कर उसे पीजीआई रेफर किया था।
ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रो. पुलक शर्मा ने बताया कि करीब 20 दिन पहले हादसे में महिला की दाहिनी जांघ की हड्डी टूट गई थी। वह सिस्टिक ब्रोंकिएक्टेसिस और गंभीर पल्मोनरी हाइपरटेंशन से पीड़ित थी। ट्रॉमा सेंटर पहुंचने पर उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन 82 प्रतिशत था, जबकि सामान्य तौर पर 98 से 100 फीसदी होता है।
जोखिम को देखते हुए ऑर्थोपेडिक्स, एनेस्थीसिया, कार्डियोलॉजी और पल्मोनोलॉजी विभाग की टीम ने मिलकर इलाज की रणनीति बनाई। डॉक्टरों के मुताबिक, सामान्य एनेस्थीसिया और पारंपरिक स्पाइनल एनेस्थीसिया जोखिम भरे थे। इसलिए अल्ट्रासाउंड-गाइडेड कंटीन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया गया। माइक्रो-कैथेटर से नियंत्रित मात्रा में दवा देकर हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखा गया। फ्रैक्चर को मिनिमली इनवेसिव तकनीक से जोड़ा गया, जिसमें कम खून बहा और छोटा चीरा लगा। महिला को एक दिन आईसीयू में रखने के बाद फिजियोथेरेपी शुरू की गई और छह दिन में डिस्चार्ज कर दिया गया।
टीम में ये रहे शामिल
प्रो. पुलक शर्मा, डॉ. फुरकान उल हक, डॉ. अवनीश मिश्रा, डॉ. वंश प्रिया, डॉ. दीक्षा रानी, प्रो. आदित्य कपूर और प्रो. आलोक नाथ शामिल रहे।