श्रीरामजन्मभूमि के प्रति देश के करोड़ों लोगों की आस्था है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि आस्था पर सवाल नहीं हो सकता। सेक्युलर होने के बाद भी हमारे संविधान में भी आस्था का जिक्र किया गया है। हमें भरोसा है कि राम मंदिर के प्रति हिंदुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाएगा। ये बात भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कही। वह शनिवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड यहां मस्जिद के प्रति आस्था की बात नहीं करता, वह कहता है ये जमीन हमारी है, हम उसके ठेकेदार हैं। वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड को छोड़कर देश के सारे मुसलमानों की इच्छा है कि ये जमीन हिंदुओं को राम मंदिर निर्माण के लिए दे दी जाए। पूरा विवाद सिर्फ गर्भगृह की 2.77 एकड़ जमीन को लेकर है, इसके अलावा सरकार द्वारा अधिगृहीत की गई 67.4 एकड़ जमीन पर कोई विवाद नहीं है। ये केंद्र सरकार के पास है वह इस पर जल्द ही मंदिर निर्माण कराने जा रही है।
कहा कि ये फैसला पिछली सरकार में हो सकता था लेकिन हमने संयम बरता। अब इस भूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर कार्य शुरू कराया जाएगा, बाकी गर्भगृह पर फैसला आने पर मंदिर निर्माण पूर्ण हो जाएगा। जल्द ही यहां भव्य मंदिर का निर्माण होगा, जिससे अयोध्या पूरी दुनिया में आकर्षण का केंद्र बनेगा।
कहा कि मुस्लिमों ने भारत में 40 हजार से ज्यादा मंदिर को तोड़ा था, हम तो सिर्फ अयोध्या, मथुरा व काशी मांग रहे हैं। हम इसको लेकर रहेंगे। काशी में शिवलिंग है, औरंगजेब ने अपने फरमान में कहा था कि इसे तोड़कर हिंदुओं को मंदिर बनाने के लिए दे दिया जाए। अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट में मेरी बात सुनी जाएगी, इसमें हम पूजा के अधिकार को लेकर बहस करेंगे।
भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी अपना जन्मदिन मनाने रामनगरी में आए हुए हैं, उन्होंने कहा कि वो अपना अगला जन्मदिन भव्य राम मंदिर में मनाएंगे। इस मौके पर उनके साथ विराट हिंदुस्तान संस्था के महामंत्री जगदीश सेठी, अरविंद चतुर्वेदी, अध्यक्ष वरुण वीर, अधिवक्ता त्रिलोकी नाथ पांडेय, शक्ति सिंह, पूर्व विधायक पवन पांडेय, भी मौजूद रहे।