राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार को भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल की सरकार की तारीफ की।
वहीं, उन्होंने चुनाव आयोग से सिंबल के बजाय सिर्फ उम्मीदवारों के चेहरों के आधार पर चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आई विकृतियों के लिए राजनीतिक दलों के निशान ही सबसे अधिक जिम्मेदार हैं।
इसकी वजह से राजनीतिक दलों पर सत्ता पाने की लालसा हावी होती चली गई। नतीजतन आज पूरी राजनीतिक व्यवस्था सामाजिक सरोकारों से कट सी गई है। गोविंदाचार्य से जब नरेंद्र मोदी की शैली और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की आरक्षण पर राय के बारे में उन्होंने टिप्पणी से इन्कार कर दिया। वे बृहस्पतिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
गोविंदाचार्य ने कहा कि 1965 के बाद से राजनीति में बहुत गिरावट आई। 1965 से 1980 तक आयाराम-गयाराम का खेल रहा। फिर राजनीति पर बाहुबल की परत चढ़ाने का काम 1995 तक चला। इसके बाद 1995 से 2010 तक राजनीति से धनबल भी जुड़ गया। यही वजह है कि वर्तमान लोकसभा में सर्वाधिक करोड़पति आ गए हैं।
यह सब चुनाव चिह्न की अनिवार्यता के कारण हुआ। व्हिप व्यवस्था ने नेताओं को जनप्रतिनधि के बजाय दलप्रतिनिधि बनाकर रख दिया है। लिहाजा वे जनता के बजाय दलों के बारे में ही ज्यादा सोचते हैं।