पंचायत चुनाव में इस बार प्रत्याशियों को मनचाहा चुनाव चिह्न नहीं मिल पाएगा। निर्वाचन आयोग ने नामांकन पत्रों की जांच व नाम वापसी के बाद हिन्दी वर्णमाला के आधार पर तैयार प्रत्याशियों की सूची से चिह्न का आवंटन करने की व्यवस्था की है।
आयोग ने क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 36 और जिला पंचायत वार्ड सदस्य के लिए 53 निशानों को बतौर चुनाव चिह्न शामिल किया है।
प्रत्याशियों के हिन्दी नाम के पहले अक्षर के आधार पर चुनाव चिन्ह आवंटित होने से राशि और ज्योतिष के अनुसार भाग्यशाली चिह्न पाने की लालसा रखने वालों को निराश होना पड़ेगा।
लोकसभा व विधान सभा चुनाव में पंजीकृत राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशी पार्टी सिम्बल पर लड़ते हैं जबकि निर्दलीय व अपंजीकृत क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न का आवंटन सुझाए गए तीन विकल्प के आधार पर होता है।
तय किए गए हैं ये चिह्न
अगर कोई दो प्रत्याशी एक ही चिह्न के लिए आवेदन करता है तो लाटरी से निर्णय किया जाता है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) राजेश पांडेय के अनुसार पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों की भारी संख्या को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने नामांकन के बाद हिन्दी वर्णमाला के अक्षर के आधार पर बनने वाली सूची से चिह्न आवंटित करने की व्यवस्था की है।
आयोग ने जिला पंचायत वार्ड सदस्य के लिए 53 और क्षेत्र पंचायत वार्ड सदस्य के लिए 36 चिह्न तय किए हैं। इनमें उगता सूरज, कप-प्लेट, शेर, कबूतर का जोड़ा, टाइपराइटर, मकान, बिजली का लैंप, हवाई जहाज, कंघा, गुब्बारा, कलम-दवात, कुल्हाड़ी, थरमस, नाव, बंदूक, सूटकेस, तबला, केला, आम, गुलाब का फूल, फरसा, शंख, सुराही, मोबाइल, बेसिक टेलीफोन और फरसा इत्यादि निशान प्रत्याशियों को आवंटित होंगे।