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8 शुभ मुर्हू्त के बाद रुकेगा बारातों का दौर, फिर कब से शुरू होंगे अच्छे काम, जानें

Mon, 19 Jun 2017 03:57 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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 भगवान चार जुलाई से शयन करने जा रहे हैं। इसी के साथ चौमासा शुरू हो जाएगा। जब तक चौमासा चलेगा तब तक तमाम पुण्य कार्य रुके रहेंगे। यही नहीं बैंडबाजा और बारात का दौर जून व जुलाई माह की बची 8 लग्नों के बाद चार महीनों के लिए थम जाएगा।
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डालीगंज निवासी पं. कृष्णकांत ने बताया कि करीब 4 महीने से अधिक समय तक देवताओ के निद्रामग्न रहने के बाद जाड़ों में जागेंगे तो फिर से बैंडबाजा और बारात की धूम मचेगी।

बीच-बीच में कुछेक अबूझ मुहूर्त जरूर मिलेंगे, लेकिन शुभ कामों की शुरुआत नवंबर के तीसरे सप्ताह में ही होगी। चौमासे के दौरान साधु-संतों का विचरण थमेगा। वे चार महीनों एक ही स्थान पर रुक कर प्रभु की आराधना करेंगे। 
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बची लग्नों का गणित
जून : 22, 23, 27, 28, 29 और 30 
जुलाई : 1 और 3
इसके बाद 4 जुलाई को हरिशयनी एकादशी पर देवताओं के सोने के चलते लग्न रुक जाएगी। 31 अक्टूबर को देवोत्थानी एकादशी पर देवताओं के जगने पर 16 नवंबर से लग्न मिलना शुरू होंगी।
नवंबर : 16, 17, 19, 20, 21, 22, 23, 28 और 29
दिसंबर : 3, 4, 8, 9 और 10 तक। इसके बाद शुक्रास्त और खरमास के चलते सहालग रुकेंगी, जो जनवरी भर रुकी रहेंगी।
 
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देखें, अगली साल के सहालग

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अगले साल 2018 में बाकी संवत्सर में सहालग
फरवरी : 7, 10, 12, 13, 18, 19, 20, 23, 24, 25 और 28
मार्च : 2, 3, 5, 6, 7, 8 और 12

पं. कृष्णकांत ने बताया कि एकादशी की रात भगवान विष्णु का दुग्ध धारा से अभिषेक कराना चाहिए। नारायण सूक्ति से अभिषेक के बाद पकवानों का भोग लगाने के बाद उन्हें सुंदर आसन पर वस्त्रादि के साथ शयन करवाना चाहिए। कीर्तन और मंगलकामनाओं के बीच उन्हें शयन कराना चाहिए।

जैन समाज के विनय जैन ने बताया कि जैन मुनि आचार्य 108 श्री सुधेश सागर महाराज चार महीनों तक नगर में चातुर्मास करेंगे। 25 जून को चौक जैन मंदिर से पद विहार करते हुए सआदतगंज जैन मंदिर पहुंचेंगे। वहां 7 जुलाई से मंगलाचरण, धार्मिक अनुष्ठान के बाद चार महीनों तक चातुर्मास करेंगे।
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