भगवान चार जुलाई से शयन करने जा रहे हैं। इसी के साथ चौमासा शुरू हो जाएगा। जब तक चौमासा चलेगा तब तक तमाम पुण्य कार्य रुके रहेंगे। यही नहीं बैंडबाजा और बारात का दौर जून व जुलाई माह की बची 8 लग्नों के बाद चार महीनों के लिए थम जाएगा।
डालीगंज निवासी पं. कृष्णकांत ने बताया कि करीब 4 महीने से अधिक समय तक देवताओ के निद्रामग्न रहने के बाद जाड़ों में जागेंगे तो फिर से बैंडबाजा और बारात की धूम मचेगी।
बीच-बीच में कुछेक अबूझ मुहूर्त जरूर मिलेंगे, लेकिन शुभ कामों की शुरुआत नवंबर के तीसरे सप्ताह में ही होगी। चौमासे के दौरान साधु-संतों का विचरण थमेगा। वे चार महीनों एक ही स्थान पर रुक कर प्रभु की आराधना करेंगे।
बची लग्नों का गणित
जून : 22, 23, 27, 28, 29 और 30
जुलाई : 1 और 3
इसके बाद 4 जुलाई को हरिशयनी एकादशी पर देवताओं के सोने के चलते लग्न रुक जाएगी। 31 अक्टूबर को देवोत्थानी एकादशी पर देवताओं के जगने पर 16 नवंबर से लग्न मिलना शुरू होंगी।
नवंबर : 16, 17, 19, 20, 21, 22, 23, 28 और 29
दिसंबर : 3, 4, 8, 9 और 10 तक। इसके बाद शुक्रास्त और खरमास के चलते सहालग रुकेंगी, जो जनवरी भर रुकी रहेंगी।