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जानलेवा निकला टोमेटो केचप दूध व आइसक्रीम भी घटिया, धड़ल्ले से हो रहा सिंथेटिक कलर का इस्तेमाल

Fri, 07 Jun 2019 03:44 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ में मिलावटखोरी का धंधा तेजी से फलफूल रहा है। एफएसडीए की सख्ती बेअसर साबित हो रही है। बेखौफ धंधेबाज चंद रुपयों की खातिर खानपान सामग्री में सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल जानलेवा स्तर तक कर रहे हैं। इसका खुलासा लैब जांच रिपोर्ट में हुआ है। जांच को भेजे गए 23 में से 12 नमूनों की रिपोर्ट फेल आई है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, जांच को भेजे गए टोमेटो कैचप का नमूना जानलेवा स्तर तक मिलावट के कारण अनसेफ श्रेणी में फेल पाया गया। वहीं चिली सॉस, दूध, टोंड मिल्क, खोवा, कत्था, भुनी सुपारी व आइसक्रीम के 11 अन्य नमूने भी घटिया पाए गए। यह जानकारी मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके मिश्रा ने दी।

उन्होंने बताया कि दोषी दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ-साथ नोटिस जारी कर दिया गया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, बीते मार्च और अप्रैल में नमूने लिए गए थे और लैब जांच को भेजे गए थे। नमूना सैंपलिंग के दौरान गोमती नगर विस्तार में जय प्रकाश की दुकान से टोमैटो कैचप का नमूना लिया गया था।
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इसमें सिंथेटिक कलर की मिलावट जानलेवा स्तर तक मिली है। रिपोर्ट आने के बाद दुकान पर मौजूद उक्त ब्रांड के स्टॉक को सीज कर आरोपी के खिलाफ आपराधिक वाद दाखिल किया गया है। उन्होंने बताया कि नमूना सैंपलिंग के बाद खाद्य सामग्रियों के यह नमूने बीते मार्च व अप्रैल माह में कार्रवाई के बाद लैब जांच को भेजे गए थे।


 

सूप भी पीने लायक नहीं

डेमो
लैब से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर जानलेवा स्तर की मिलावट के कारण अनसेफ श्रेणी में फेल आए टोमेटो कैचप के नमूने के आधार पर दुकान संचालक के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में आपराधिक वाद दाखिल होगा। अधोमानक व पैकेजिंग एक्ट के उल्लंघन पर फेल नमूनों के मुकदमे एफएसडीए के न्याय दंडाधिकारी कोर्ट में दाखिल कर  जुर्माना लगवाने की पैरवी होगी।

गढ़ी कनौरा इलाके में संचालित दुर्गा ट्रैडिंग कंपनी से लिया पैक्ड कत्था व भुनी सुपारी का नमूना पैकेजिंग एक्ट के उल्लंघन के कारण जांच में फेल निकला। इनकी पैकेजिंग पर बेस्ट बिफोर के साथ ही पैकेजिंग डेट का विवरण दर्ज नहीं मिला। विकास नगर में अरूण कुमार गुप्ता द्वारा संचालित रेस्टोरेंट में परोसे जा रहे कॉन्टीनेंटल सूप का नमूना भी घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण लैब जांच में अधोमानक निकला।

सिविल अस्पताल पार्क रोड के समीप संचालित पीतांबर लालवानी के बूथ से फुलक्रीम मिल्क का नमूना, राणाप्रताप मार्ग पर संचालित क्वॉलिटी फूड रेस्टोरेंट से आइसक्रीम, प्राग नारायण रोड पर सुरेंद्र यादव की दुकान से टोंड मिल्क और डूडा कॉलोनी में मेंहदीहसन की डेयरी से लिए भैंस दूध के नमूने लेकर जांच को भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में इनमें फैट की मात्रा तय मानक से काफी कम पाए जाने के कारण इन्हें घटिया और अधोमानक श्रेणी में फेल बताया गया है।
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साल भर में लिए 977 में से 478 नमूने फेल

मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने में जुटी एफएसडीए की जिला इकाई ने 31 मार्च 2019 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष के दौरान साल भर में 977 नमूने लैब जांच को भेजे। इनमें से 478 नमूने मानकों की कसौटी पर खरे साबित न होने पर फेल साबित हुए। नोटिस भेजने की कार्रवाई बाद इनमें से 468 के खिलाफ संबंधित कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया।

एक साल के दौरान एफएसडीए कोर्ट ने 68 वादों को निस्तारित करते हुए आरोपियों के खिलाफ 17.43 लाख का जुर्माना लगाने की कार्रवाई हुई। जबकि एसीजेएम कोर्ट में लंबित एक मामले की सुनवाई बाद हल्दी में सिंथेटिक कलर की मिलावट के आरोपी को तीन माह की जेल व एक हजार का जुर्माना लगाने की कार्रवाई हुई।

गुर्दे से लिवर तक को खतरा
सिंथेटिक कलर खाने से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह गुर्दे व लिवर को प्रभावित करता है। इसके अलावा लोगों में अल्सर तक होने की संभावना रहती है। पेट में पाॅइजनिंग तक हो सकती है। - डॉ सुमित रोंगटा, गैस्टो मेडिसिन के प्रभारी, केजीएमयू
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