लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में स्नातक के सभी विद्यार्थियों के लिए मूल्य आधारित (वैल्यू एडेड) विषयों की पढ़ाई अनिवार्य हो गई है। प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वालों को तीन क्रेडिट के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विवधता संरक्षण और सतत विकास जैसे विषय अब पढ़ने ही होंगे। इसी सत्र से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।
प्रथम के बाद दूसरे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को योग, खेल, डिजिटल-तकनीकी समाधान और भारतीय संविधान में से किसी एक विषय को अनिवार्य रूप से चुनना होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नई व्यवस्था के तहत पुनर्वास विवि ने यह व्यवस्था अपनाई है।
इसके तहत विद्यार्थियों को मुख्य विषय के साथ सामाजिक, व्यावसायिक और नैतिक ज्ञान दिया जाएगा । विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश के लिए 12 अगस्त तक आवेदन लिए जाएंगे। नए छात्र जब काउंसिलिंग में पहुंचेंगे तो उनको विषय अनुसार नए नियम का पालन करना होगा।
भाषा में दक्ष होंगे विद्यार्थी
नई शिक्षा नीति स्थानीयता के साथ भाषाओं की प्रवीणता की बात भी करती है। इसे देखते हुए पुनर्वास विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर पर अंग्रेजी, संस्कृत और हिंदी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य की है। स्नातक स्तर पर सभी संकायों के पहले व दूसरे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा व संप्रेषण में क्षमता वृद्धि और कौशल वृद्धि की पढ़ाई अनिवार्य रूप से करनी होगी। तीसरे व चौथे सेमेस्टर में हिंदी भाषा व संप्रेषण या संस्कृत भाषा व संप्रेषण में से किसी एक भाषा का क्षमता वृद्धि का कोर्स करना होगा। इन तीनों भाषाओं में दो-दो क्रेडिट प्रति सेमेस्टर यानी कुल आठ क्रेडिट का पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
मल्टी डिसीप्लिनरी कोर्स के रूप में चुनने होंगे ये कोर्स
स्नातक स्तर पर मल्टी डिसीप्लिनरी कोर्स के रूप में नेचुरल एंड फिजिकल साइंस, मैथमेटिक्स स्टेटिस्टिक्स व कंप्यूटर एप्लीकेशन, ह्यूमैनिटीज व सोशल साइंस, कॉमर्स व मैनेजमेंट, लाइब्रेरी इंफॉरमेशन व मीडिया साइंस में से किसी तीन को पहले, दूसरे और तीसरे सेमेस्टर के तहत चुनना होगा। विवि के प्रवक्ता प्रो यशवंत वीरोदय का कहना है कि नए सत्र से छात्रों को नए नियमों के साथ काउंसिलिंग की प्रक्रिया के दौरान कोर्स का चयन करना होगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने विषय से इतर जागरूकता देना है। इससे उनका सर्वांगीण विकास होगा।