उन्होंने कहा कि असफल होने पर पहले से दोगुनी ताकत के साथ और मेहनत करने की जरूरत होती है। अगर किसी को लगता है कि वह और अच्छा कर सकता था लेकिन नहीं कर पाया तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। मान लेना चाहिए कि जो हुआ, अच्छा हुआ।
उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं को आगे की सोचना चाहिए कि और अच्छी छलांग कैसे लगा सकते हैं। इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दीजिए। इससे आपका जीवन मंगलमय होगा। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा, विधि एवं न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक, जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र सिंह, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा व गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा उपस्थित रहे।
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इस तरह सम्मानित हुए मेधावी
- कुल मेधावी -173
- यूपी बोर्ड राज्य स्तरीय - हाईस्कूल-22, इंटरमीडिएट-14
- यूपी बोर्ड जिला स्तरीय- हाईस्कूल-68, इंटरमीडिएट- 69
- अखिल भारतीय स्तर पर परचम लहराने वाले लखनऊ से जुड़े अन्य बोर्डों के 22 मेधावी
- अखिल भारतीय मेधावियों में सीबीएसई, आईसीएसई व आईएससी के प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वाले शामिल हैं।
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा
- फोटो : amar ujala
इस मौके पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बच्चों को जीवन में सफलता पाने के रहस्य बताए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी खेल-कूद और मनोरंजन के साथ पढ़ाई-लिखाई करें। अपनी दिनचर्या में हर काम का समय निर्धारित करें। गलाकाट प्रतियोगिता के स्थान पर सदैव स्वस्थ प्रतियोगिता को महत्व दें। साथ ही अपने करियर काउंसलर भी खुद ही बनें।
डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे स्वप्न न देखें, जिसके तत्काल बाद रजाई ओढ़कर सो जाएं। इसके बजाय ऐसे सपने देखें जो आपको रजाई छोड़कर लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बच्चों के सामने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण भी रखा।
स्वास्थ्य पर भी दें ध्यान
डॉ. शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, मैं कभी भी सेकेंड डिवीजन में पास नहीं हुआ। सदैव प्रथम श्रेणी आई। व्यवस्थित तरीके से पढ़ाई करने से ही यह संभव हो सका। हर चीज के लिए टाइम टेबल बनाओ। इसमें खेदकूद और मनोरंजन के लिए भी स्थान दो। आगे बढ़ने के लिए स्वस्थ रहना भी आवश्यक है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि यूपी बोर्ड में 75 प्रतिशत और सीबीएसई व आईसीएसई में 80 प्रतिशत अंक पाने वाले लखनऊ मंडल के विद्यार्थियों को एचसीएल 15 महीने तक ट्रेनिंग देगा। इन 15 महीनों तक उसे 10 हजार रुपये महीने पारिश्रमिक भी मिलेगा। 15 महीने बाद छात्र के नौकरी करने पर उसे 2.20 लाख रुपये सालाना का पैकेज भी मिलेगा।
यह भी व्यवस्था की गई है कि अगर ये विद्यार्थी बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी से डिग्री लेते हैं तो आधी फीस एचसीएल देगा, जबकि आधी फीस विद्यार्थी को देनी होगी। इसके पीछे की मंशा यह है कि विद्यार्थी आगे चलकर डिग्रीधारी बेरोजगार बनकर न रह जाएं।