यूपी में हिंदी को राजभाषा का दर्जा होने और मातृभाषा होने के बावजूद यूपी बोर्ड में करीब 30 प्रतिशत परीक्षार्थी हिंदी में फेल हो गए।
शुक्रवार को घोषित हुए यूपी बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट में हाईस्कूल में 81 तो इंटरमीडिएट में 89 प्रतिशत परीक्षार्थी हिंदी में सफल रहे हैं। जबकि, बंगला, सिंधी, मलयालम व नेपाली भाषा में सक्सेज प्रतिशत सौ फीसदी रहा है।
इसके पहले 2016 में हिंदी विषय में हाईस्कूल में 82.25 तो इंटरमीडिएट में 95.67 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए थे।
अगर हम हाईस्कूल के सभी 36 विषयों से हिंदी में सक्सेज प्रतिशत की तुलना करें तो पाएंगे कि हिंदी के मुकाबले बंगला में सौ फीसदी, उर्दू में 87.78 फीसदी, पंजाबी में 85.71 फीसदी, पाली में 99.58 फीसदी, अरबी में 93.18 फीसदी, संगीत (गायन) में 89.58 प्रतिशत, संगीत (इंस्ट्रूमेंट) में 89.51 फीसदी, ड्राइंग में 88.85 फीसदी, गृह विज्ञान में 91.21 फीसदी, कढ़ाई-बुनाई (स्टिचिंग) में 87.17 फीसदी व कम्प्यूटर में 89.92 फीसदी परीक्षार्थी सफल रहे हैं।
ये हाल रहा इंटरमीडिएट में
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वहीं, इंटरमीडिएट में हिंदी में 89.04 प्रतिशत जबकि ऐलीमेंट्री हिंदी में 92.96 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल हुए। हाईस्कूल की तरह 12वीं में भी बंगला, सिंधी, मलयालम व नेपाली में परीक्षार्थियों का सफलता प्रतिशत सौ फीसदी रहा।
हिंदी के मुकाबले अन्य विषयों में सफलता का प्रतिशत अच्छा रहा। उर्दू में 92.62 प्रतिशत, पंजाबी में 98.85 प्रतिशत, अरबी में 97.41 प्रतिशत, मनोविज्ञान में 89.56 प्रतिशत, शिक्षा शास्त्र में 89.63 पतिशत, गृह विज्ञान में 91.01 प्रतिशत, अर्थशास्त्र में 90.79 प्रतिशत, संगीत (गायन) में 96.18 प्रतिशत, संगीत (वाद्य) 95.14 प्रतिशत, ड्राइंग में 96.34 प्रतिशत, बिजनेस ऑर्गनाइजेशन में 97.04 प्रतिशत जबकि अकाउंट्स में परीक्षार्थियों का सक्सेज प्रतिशत 96.34 प्रतिशत रहा। जो कि हिंदी के मुकाबले काफी बेहतर है।