जलालपुर। जैतपुर क्षेत्र के रामगढ़ गांव में छात्र दिव्यांशु मौर्य (16) की बृहस्पतिवार देर शाम को अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन पहले स्थानीय निजी अस्पताल ले गए। हालत नाजुक होने पर दिव्यांशु को रेफर कर दिया गया। परिजनों ने आजमगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां शुक्रवार भोर उसकी मौत हो गई। मृतक के बयान के आधार पर पिता ने उसके एक साथी पर विषाक्त पदार्थ का सेवन कराकर हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है।
रामगढ़ गांव निवासी विनोद मौर्य के पुत्र दिव्यांशु मौर्य (16) ने माता बदल जायसवाल इंटर कॉलेज भीखपुर से इसी वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और 11वीं में प्रवेश की तैयारी थी। पिता विनोद के अनुसार दिव्यांशु बृहस्पतिवार शाम को अपने घर पर ही था। इसी बीच उसके एक पुराने साथी अंकित श्रीवास्तव ने फोन कर मिलने के लिए बुलाया। दिव्यांशु गांव से कुछ दूरी पर बाजार में उससे मुलाकात करने गया। यहां दोनों ने साथ में कुछ खाया-पिया। इसके बाद अपने-अपने घर चले गए।
घर पहुंचने के कुछ देर बाद दिव्यांशु की हालत बिगड़ने लगी और उसे उल्टियां शुरू हो गईं। परिजनों ने तत्काल एक चिकित्सक को बुलाकर दिखाया, लेकिन चिकित्सक ने हालत गंभीर बताते हुए जवाब दे दिया। इसके बाद परिजन उसे पहले स्थानीय अस्पताल लेकर गए और फिर आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां सुबह करीब पांच बजे उसने दम तोड़ दिया। परिजन शव लेकर घर चले गए और वहां पहुंचकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने छात्र के शव का पोस्टमार्टम कराया।
पिता विनोद ने बताया कि रात करीब दो बजे दिव्यांशु ने होश में आने पर अंकित पर चने में कुछ मिलाकर खिलाने की बात कही थी, जिसके बाद ही उसकी हालत बिगड़ी थी। पिता का आरोप यह भी है कि पूर्व में अंकित से दिव्यांशु का विवाद भी हो चुका है। आरोप है कि इसी के चलते विषाक्त पदार्थ खिलाकर हत्या की गई है। सीओ जलालपुर अनूप कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों से प्राप्त तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मासूम बहन बार-बार पूछ रही “भइया कब आएंगे?”
जिस घर में बेटे की हंसी गूंजती थी वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और सिसकियों की आवाज सुनाई दे रही है। परिवार के इकलौते बेटे दिव्यांशु की असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पिता विनोद कुमार खाद-बीज की दुकान चलाकर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी सारी उम्मीदें, सपने और भविष्य बेटे दिव्यांशु से जुड़े थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। बेटे की मौत ने परिवार को ऐसा जख्म दिया है जिसे शायद जिंदगी भर भुलाया नहीं जा सकेगा। सात वर्षीय बहन आयुषी जिसे अभी पूरी तरह समझ भी नहीं है कि उसका बड़ा भाई अब कभी वापस नहीं आएगा। वह घर में आने वाले हर व्यक्ति से मासूमियत से पूछ रही है “भइया कब आएंगे?” यह सवाल सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर जा रही हैं। बाबा सीताराम और दादी ज्ञानमती भी गहरे सदमे में हैं।