फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहीं तय हो पाया मॉडल, टल सकते है छात्रसंघ चुनाव

Fri, 09 Sep 2016 03:20 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डेमो
विज्ञापन
एलयू में छात्रसंघ चुनाव टलने के आसार हैं। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार डिग्री स्तर पर छात्रसंघ चुनाव सत्र शुरू होने से छह से आठ सप्ताह के बीच में होने चाहिए। इसके लिए अलग-अलग मॉडल भी सुझाए गए हैं। 
विज्ञापन


इसी तरह विवि का शैक्षिक सत्र 16 जुलाई से शुरू हुआ था। इस लिहाज से चुनाव की अवधि शनिवार को समाप्त हो जाएगी। इसको लेकर शासन और राजभवन को पत्र लिखे जा रहे हैं, पर अभी तक चुनाव का मॉडल तक तय नहीं हो पाया है।

वहीं, मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में निर्धारित अवधि में चुनाव होना संभव नहीं लगता है। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव पर लगी रोक हटा दी गई थी। 
विज्ञापन


इसके बाद हर साल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में चुनाव की मांग की जाती है। चुनाव के दौरान होने वाली हिंसा और पानी की तरह बहने वाले धन को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव पर रोक लगाई थी।

बाद में जेएम लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार ही चुनाव कराने की सहमति बनी थी। लिंगदोह समिति की सिफारिशों में सत्र की शुरुआत में ही चुनाव कराने के लिए कहा गया है ताकि पढ़ाई का नुकसान न हो। 

चुनाव के लिए समिति की ओर से सुझाए गए चार में से एक मॉडल तय करने की भी बात है। विवि में इसको लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखा जा चुका है, पर असली मामला हाईकोर्ट में लटका हुआ है। विवि के लिए चुनाव का मॉडल कौन तय करेगा, असल में मामला यहीं अटका है। 

एलयू में छात्रसंघ चुनाव का मॉडल तय करने का मुद्दा कोर्ट में है। असल में विवि प्रशासन बड़े विवि और एसोसिएट कॉलेज की संख्या का हवाला देते हुए इनडायरेक्ट चुनाव का पक्षधर है। इस संबंध में कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने शासन को पत्र भी भेजा था। 
 
विज्ञापन

‌ल‌िंगदोह स‌म‌ि‌त‌ि ने सुझाए मॉडल

डेमो
दूसरी ओर छात्रनेता डायरेक्ट चुनाव चाहते हैं। उनके दबाव के बाद विवि प्रशासन ने शासन को भेजे गए दूसरे पत्र में डायरेक्ट चुनाव कराने पर भी सहमति जताई थी। शासन मॉडल तय करने का जिम्मा विवि पर डाल रहा है। ऐसे में चुनाव का मॉडल तय नहीं हो पा रहा है और मामला कोर्ट में जस का तस है।

लिंगदोह समिति ने सुझाए हैं ये मॉडल-
पहला मॉडल- डायरेक्ट इलेक्शन
विवि में डायरेक्ट इलेक्शन होंगे। इसके अनुसार विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों के लिए स्टूडेंट्स खड़े होंगे। परिसर के सभी छात्र मतदान के जरिए छात्रसंघ के पदाधिकारियों का चयन करेंगे।

दूसरा मॉडल- डायरेक्ट-इनडायरेक्ट इलेक्शन्स इन कॉलेज-कैंपस, यूनिवर्सिटी(बड़ा विवि)
विवि और कॉलेजों में सीधे इलेक्शन होंगे। इसमें विवि और कॉलेजों में हर क्लास के प्रतिनिधि चुने जाएंगे। इनमें से डायरेक्ट इलेक्शन के माध्यम से विवि पदाधिकारियों के लिए रिप्रेजेंटेटिव्स का चयन किया जाएगा। इस तरह चुनकर आए प्रतिनिधि में ओवरआल प्रतिनिधि चुना जाएगा।

तीसरा मॉडल- डायरेक्ट-इनडायरेक्ट इलेक्शन्स इन कॉलेज-कैंपस, यूनिवर्सिटी(बड़ा विवि)
कॉलेजों में क्लास रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव करने की बात है। इनमें से विवि प्रतिनिधि के लिए के रिप्रेजेंटेटिव्स का चयन किया जाएगा। दूसरी ओर विवि में डायरेक्ट इलेक्शन के माध्यम से यूनिवर्सिटी रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव होगा। इन सभी प्रतिनिधियों में से अप्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से ओवरआल प्रतिनिधि का चयन होगा।

चौथा मॉडल- डायरेक्ट-इनडायरेक्ट इलेक्शन्स इन कॉलेज-कैंपस, यूनिवर्सिटी(बड़ा विवि)
विवि और डिग्री कॉलेज दोनों जगह क्लास रिप्रेंजेटेटिव्स चुने जाते हैं। इनमें से विवि के प्रतिनिधि के लिए छात्रों का चयन होता है। इस तरह हुए चुने हुए प्रतिनिधियों में से ओवरआल प्रतिनिधि का चयन इनडायरेक्ट इलेक्शन के माध्यम से किया जाएगा।

लिंगदोह समिति की सिफारिश के अनुसार छह से आठ सप्ताह की अवधि इस सप्ताह समाप्त हो रही है। इस दौरान समिति ने केवल डायरेक्शन दिया है। इस अवधि के बीतने के बाद भी इलेक्शन कराए जा सकते हैं। -प्रो. एनके पांडेय , प्रवक्ता, लविवि
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें