एलयू में छात्रसंघ चुनाव टलने के आसार हैं। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार डिग्री स्तर पर छात्रसंघ चुनाव सत्र शुरू होने से छह से आठ सप्ताह के बीच में होने चाहिए। इसके लिए अलग-अलग मॉडल भी सुझाए गए हैं।
इसी तरह विवि का शैक्षिक सत्र 16 जुलाई से शुरू हुआ था। इस लिहाज से चुनाव की अवधि शनिवार को समाप्त हो जाएगी। इसको लेकर शासन और राजभवन को पत्र लिखे जा रहे हैं, पर अभी तक चुनाव का मॉडल तक तय नहीं हो पाया है।
वहीं, मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में निर्धारित अवधि में चुनाव होना संभव नहीं लगता है। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव पर लगी रोक हटा दी गई थी।
इसके बाद हर साल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में चुनाव की मांग की जाती है। चुनाव के दौरान होने वाली हिंसा और पानी की तरह बहने वाले धन को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव पर रोक लगाई थी।
बाद में जेएम लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार ही चुनाव कराने की सहमति बनी थी। लिंगदोह समिति की सिफारिशों में सत्र की शुरुआत में ही चुनाव कराने के लिए कहा गया है ताकि पढ़ाई का नुकसान न हो।
चुनाव के लिए समिति की ओर से सुझाए गए चार में से एक मॉडल तय करने की भी बात है। विवि में इसको लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखा जा चुका है, पर असली मामला हाईकोर्ट में लटका हुआ है। विवि के लिए चुनाव का मॉडल कौन तय करेगा, असल में मामला यहीं अटका है।
एलयू में छात्रसंघ चुनाव का मॉडल तय करने का मुद्दा कोर्ट में है। असल में विवि प्रशासन बड़े विवि और एसोसिएट कॉलेज की संख्या का हवाला देते हुए इनडायरेक्ट चुनाव का पक्षधर है। इस संबंध में कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने शासन को पत्र भी भेजा था।