फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदी साहित्य से जुड़कर खुद को संवार रहे हैं भावी इंजीनियर 

Tue, 25 Aug 2020 08:33 PM IST
ishwar ashish अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
क्लब के सदस्य - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
प्रदेश के सबसे पुराने इंजीनियरिंग संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) में विद्यार्थियों ने अपने बीच ही भावी इंजीनियरों को हिंदी, साहित्य से जोड़ने और सोशल स्किल विकसित करने की पहल शुरू की है।
विज्ञापन


इसका मकसद है कि भावी इंजीनियर जब डिग्री लेकर निकले तो सिर्फ किताबी कीड़े बनकर न रह जाए। उनकी सोशल स्किल अच्छी हो, वे समाज से जुड़ें और उसके लिए काम भी करें।

आईईटी के विद्यार्थियों ने दो-तीन साल पहले अपना क्लब ‘एक्सेलसियर’ बनाया। यह अपने बीच के स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग के साथ साहित्य से जोड़ने, हिंदी लिखने-बोलने, उनकी क्षमता विकसित कर रहा है।
विज्ञापन


इसके लिए क्लब समय-समय पर इससे जुड़े वाद-विवाद, सृजनात्मक लेखन, भाषण, ग्रुप डिस्कशन, कविता पाठ, साहित्य से जुड़ी प्रतियोगिता करवाता है।

मंच पर युवा दिखाते हैं अपना हुनर

इससे जुड़े विद्यार्थियों ने बताया कि यह क्लब साहित्य से जुड़े लोगों का एक मंच है, जहां युवा अपना हुनर दिखाते हैं। समय-समय पर होने वाली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को इसके लिए तैयार भी किया जाता है।

इसमें उन युवाओं को मेंटर के रूप में रखा जाता है जो हिंदी बैकग्राउंड से आते हैं और उनका इस पर अच्छा नियंत्रण होता है। ये न सिर्फ अन्य युवाओं को लिखना-पढ़ना बताते हैं, बल्कि उनकी पूरी कोचिंग करते हैं।

इसके साथ यहां के युवा समय-समय पर आईआईएम, आईआईटी, बीएचयू में होने वाली साहित्य से जुड़ी प्रतियोगिताओं में शामिल होते और पुरस्कार भी जीतते हैं।

क्लब समन्वयक मो. फैसल व जयेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि हम हर साल नए सदस्य बनाते हैं। उनका चयन भी लेख परीक्षण और इंटरव्यू से होता है। इसके बाद हम हर हफ्ते, 15 दिन में वैश्विक व राष्ट्रीय नीतियों, वाद-विवाद प्रतियोगिता करवाते हैं।

इसमें किताबों, लेखकों, कवियों और उनकी रचनाओं पर विस्तार से चर्चा होती है। इनसे जुड़ी प्रश्नोत्तरी व सृजनात्मक लेखन जैसे कार्यक्रम भी कराए जाते हैं।     
विज्ञापन

सौहार्दपूर्ण माहौल में करते हैं एक-दूसरे की मदद 

संयोजक कौस्तुभ जायसवाल, ऋषभ मिश्रा, अनन्या सिंह ने बताया कि क्लब के कार्यक्रमों में सौहार्दपूर्ण वातावरण में सबको अपनी बात रखने और सीखने का मौका दिया जाता है।

जब किसी कार्यक्रम का ऑडिशन होता है तो सीखने वालों को वरीयता देते हैं। इसमें अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स नेतृत्व करते हैं और नए विद्यार्थियोें को हिंदी और अंग्रेजी दोनों सिखाते हैं।

ऐसे कार्यक्रमों से जूनियर व सीनियर के बीच में संबंध भी अच्छे होते हैं। इसका ही असर है कि संस्थान में कभी किसी तरह का आपसी विवाद नहीं होता और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सभी अपना कोर्स पूरा करते हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन आयोजन हो रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें