फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मथुरा में भाजपा की मजबूत घेराबंदी : कमल को फिर खिलने से रोकने के लिए कांग्रेस, सपा और बसपा ने लगाया पूरा जोर

Tue, 25 Jan 2022 10:48 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव एसएस अवस्थी, अमर उजाला, मथुरा

सार

भाजपा ने प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा पर ही फिर से दांव लगाया है। जनपद की पांच में से दो सीटों पर अपने पुराने चेहरों को बदलने वाली भाजपा का यह मथुरा में ब्राह्मण कार्ड है।
विज्ञापन
यूपी चुनाव 2022: मथुरा विधानसभा सीट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कांग्रेस की लगातार तीन जीत के बाद भाजपा ने पिछले चुनाव में मथुरा विधानसभा क्षेत्र को अपने कब्जे में लिया था। इसे बरकरार रखने के लिए भाजपा ने प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा पर ही फिर से दांव लगाया है। जनपद की पांच में से दो सीटों पर अपने पुराने चेहरों को बदलने वाली भाजपा का यह मथुरा में ब्राह्मण कार्ड है। इस कार्ड को फेल करने के लिए कांग्रेस ही नहीं, सपा और बसपा ने भी तगड़ी घेराबंदी कर दी है। यहां बसपा ने भाजपा से मांट में टिकट न मिलने पर विद्रोह करने वाले ब्राह्मण नेता एसके शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है, तो कांग्रेस यहां से चार बार विधायक रह चुके प्रदीप माथुर के सहारे मैदान में उतरी है। रालोद-सपा गठबंधन ने बहुसंख्यक वैश्य की मौजूदगी को देखते हुए देवेंद्र अग्रवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है।

विज्ञापन


ब्राह्मण-वैश्य बहुल है मथुरा विधानसभा क्षेत्र : धर्म नगरी मथुरा-वृंदावन शहरी क्षेत्र मथुरा विधानसभा का हिस्सा है। पहले इसे मथुरा-वृंदावन विधानसभा क्षेत्र कहा जाता था, लेकिन अब यह सिर्फ  मथुरा के नाम से दर्ज है। यहां करीब 70 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। 60 हजार वैश्य और 50 हजार मुस्लिम मतदाता भी समीकरणों में उलटफेर का माद्दा रखते हैं। महानगर के नए विस्तारित क्षेत्र में 10 हजार क्षत्रिय और 35 हजार जाट हैं।

बसपा ब्राह्मण नेता के सहारे तो सपा वैश्य के सहारे यहां भाजपा का खेल बिगाड़ने की कोशिश में है तो कांग्रेस अपने आजमाए मोहरे को लेकर ही सियासी दांवपेच चल रही है।
विज्ञापन

ऐसा था पिछला विधानसभा चुनाव का संग्राम : 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने श्रीकांत शर्मा को मैदान में उतारा तो कांग्रेस-सपा गठबंधन से प्रदीप माथुर चुनाव लडे़ थे। मोदी की लहर वाले इस चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस-सपा गठबंधन से यह सीट रिकॉर्ड मतों से छीन ली थी। श्रीकांत शर्मा को भाजपा उम्मीदवार के रूप में 1,43,361 मत मिले थे, जो कुल मतों का 56.65 प्रतिशत था। प्रदीप माथुर को 42,200 मत मिले थे। इस तरह एक लाख से अधिक मतों से भाजपा ने जीत दर्ज की थी।

इतना विकास पहले कभी नहीं हुआ
मथुरा का विकास जितना पिछले पांच वर्षों में हुआ, उतना कभी नहीं हुआ। यमुना में करीब 80 प्रतिशत नालों का गिरना बंद किया जा चुका है। चंद दिनों बाद पूरी तरह से यमुना में नालों का गिरना बंद हो जाएगा। गंगा जल की आपूर्ति हो रही है। बिजली 24 घंटे मिल रही है। विकास की अनेक परियोजनाएं   पूरी हो चुकी हैं। -श्रीकांत शर्मा, ऊर्जा मंत्री व विधायक मथुरा

सिर्फ वादे हुए, काम नहीं हुआ
मथुरा विकास में पिछड़ गया है। सिर्फ  वादे किए गए, कोई काम इन पांच सालों में नहीं हुआ। एनसीआर का वादा, मेट्रो ट्रेन चलाने का वादा पूरा नहीं हुआ। बिजली महंगी हो गई। दुकानदारों को लक्ष्य बनाकर बिजली के अफसरों से कार्रवाई कराई गई है। स्वच्छता में मथुरा और पिछड़ गया है। इन पांच सालों में कोई उपलब्धि नहीं है। -प्रदीप माथुर, प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस

जातीय समीकरण 
सीट पर ब्राह्मण और वैश्यों  के साथ मुस्लिम, जाट, क्षत्रिय निर्णायक बनते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या मथुरा   में सर्वाधिक मतदाताओं वाले वर्ग में गिनी जाती है। 

- जाटव, निषाद, बघेल सहित अन्य जातियां भी यहां उलटफेर करने में सहायक बनती हैं। मथुरा सीट जनपद के अन्य सभी विधानसभा क्षेत्रों के बीच में है। इसके आसपास छाता, मांट, गोवर्धन और बलदेव विधानसभा क्षेत्र हैं। इसमें छाता और मांट वीआईपी सीट हैं। 
विज्ञापन

2017 के नतीजे
श्रीकांत शर्मा, भाजपा 143361  
प्रदीप माथुर,  कांग्रेस,  42200
योगेश कुमार, बसपा, 31,168
अशोक अग्रवाल, रालोद, 29,080

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें