सरकारी अस्पतालों और संस्थानों में नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल के दूसरे दिन शनिवार को भी इलाज की व्यवस्था बेपटरी रही। डेंगू और वायरल फीवर के मरीजों की बढ़ती भीड़ के बीच नर्सों के काम बंद करने से लोहिया, बलरामपुर, लोकबंधु व रानी लक्ष्मीबाई अस्पतालों में अफरातफरी का माहौल रहा।
शनिवार को भी अस्पतालों में 27 ऑपरेशन टालने पड़े। हड़ताल से निपटने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल के डॉक्टरों, इंटर्न और फार्मासिस्टों को ड्यूटी पर लगाया लेकिन इसके बाद भी मरीजों को दवा और जांच के लिए भटकना पड़ा।
अधिकारियों और डॉक्टरों का तो यहां तक कहना है कि सोमवार तक हड़ताल खत्म नहीं हुई तो पूरी व्यवस्था बेपटरी हो जाएगी।
गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में संशोधन और ग्रेड पे बढ़ाने की मांग को लेकर ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फ्रंट के बैनर तले सरकारी अस्पतालों में तैनात नर्सिंग स्टाफ हड़ताल पर हैं।
लोहिया में दूसरे दिन भी ओटी बंद
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लोहिया अस्पताल में दूसरे दिन भी ओटी बंद रही। जनरल सर्जरी, मोतियाबिंद, आर्थो समेत अन्य विभागों में पहले से तय 16 ऑपरेशन नहीं हो सके। अस्पताल के निदेशक ने हड़ताल से निपटने के लिए अस्पताल में तैनात करीब 90 डॉक्टरों को ओपीडी के साथ वार्ड में तैनाती का शेड्यूल जारी किया है। हड़ताल से जनरल इमरजेंसी से लेकर महिला इमरजेंसी और वार्ड में भर्ती करीब 400 मरीजों को परेशानी हो रही है।
बलरामपुर में संविदा नर्सों ने संभाली जिम्मेदारी
बलरामपुर अस्पताल में तैनात 100 नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर रहने से शनिवार को पहले से प्रस्तावित चार मरीजों की मेजर सर्जरी नहीं हो सकी। सीएमएस डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि अस्पताल के रेजीडेंट, इंटर्न और अन्य फार्मासिस्ट को ड्यूटी पर लगाया गया है।
यहां हड़ताल बेअसर
लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. दीपक मालवीय ने बताया कि शनिवार और रविवार को ओटी बंद रहती है। ऐसे में कोई भी इलेक्टिव ऑपरेशन नहीं होते हैं। वहीं लोहिया संस्थान के नर्सिंग स्टाफ के नेता अमित शर्मा ने बताया कि 167 स्टाफ के हड़ताल पर रहने की वजह से वार्ड में भर्ती मरीजों को परेशानी हो रही है।
क्वीन मेरी, झलकारीबाई और डफरिन अस्पताल में हड़ताल का कोई खास असर नहीं पड़ा। संविदा पर तैनात नर्सों की संख्या अधिक होने से वार्ड से लेकर इमरजेंसी तक हालात सामान्य रहे। क्वीन मेरी में शनिवार को किसी भी प्रकार की सर्जरी नहीं की जाती है।
पीजीआई में भी ब़ुरा हाल
हड़ताल के नाम पर मरीजों के साथ अन्य स्टॉफ ने भी जमकर अभद्रता की। इमरजेंसी हो या वार्ड कहीं भी मरीजों के साथ रियायत नहीं बरती गई। शुक्रवार शाम तक किसी भी मरीज को कुछ नहीं बताया गया लेकिन आधी रात से ही मरीजों को जबरन डिस्चार्ज करना शुरू कर दिया गया था।
स्थिति ये थी कि जनरल वार्डों से 90 फीसदी मरीजों को जबरन डिस्चार्ज किया गया तो सिक्योरिटी गार्डों ने उन्हें परिसर में रुकने नहीं दिया। रात भर मरीजों के लिए उनके परिवारीजन भटकते रहे। इमरजेंसी के भी आधे से अधिक मरीजों को शनिवार शाम तक डिस्चार्ज कर दिया गया था। ओपीडी के 500 से अधिक मरीजों को बिना रजिस्ट्रेशन के ही लौटा दिया गया।
डीएम-एसएसपी ने भी समझाया
डीएम सत्येंद्र सिंह, एसएसपी मंजिल सैनी शनिवार शाम को पीजीआई पहुंचे। डीएम ने नेताओं से इलाज प्रभावित न करने की अपील की। इस पर नर्सों की नेता सीमा शुक्ला, सुजान सिंह, सुनील रुपजी, अजय सिंह ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि इन सेवाओं बाधित नहीं करेंगे।
अधिकारियों ने भी सोमवार को नेतओं की वार्ता मुख्य सचिव से कराने का आश्वासन दिया है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अमित अग्रवाल ने कहा कि आईसीयू में रेजीडेंट डॉक्टरों को ड्यूटी पर लगा दिया है।
12 को मांगों पर होगी वार्ता
हड़ताल वापसी के बारे में नर्सेज फ्रंट की अध्यक्ष सीमा शुक्ला और महामंत्री अशोक कुमार, पीजीआई नर्सेस एसोसिएशन के महामंत्री सुजान सिंह ने बताया कि केंद्र के आश्वासन के बाद ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशन ने हड़ताल खत्म कर दी है। 12 सितंबर को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से बैठक होगी। उसी दौरान मांगों पर वार्ता होंगी।