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अंधेरे की ओर बढ़ रही राजधानी : 15 हजार स्ट्रीट लाइटें खराब, अब कंपनी ने दी रखरखाव ठप करने की धमकी

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लखनऊ। स्ट्रीट लाइट के रखरखाव में पिछले दो साल से लापरवाही कर रही निजी कंपनी ईईएसएल ने 94 करोड़ से अधिक का बकाया बताते हुए काम ठप करने की धमकी दी है। इस बारे में उसने नगर निगम को पत्र भेजा है। मार्ग प्रकाश विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक कंपनी द्वारा रखरखाव में लापरवाही से शहर में करीब 15 हजार लाइटें खराब पड़ी हैं। इन्हें ठीक नहीं कराया जा रहा है।
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कंपनी ने नगर आयुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि बकाया धनराशि का भुगतान न होने से स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव में दिक्कत आ रही है। बकाये के चलते कंपनी ने नई एलईडी लाइटें लगाने का काम पहले ही बंद कर दिया है। अब कहा है कि समय रहते भुगतान न हुआ तो शहर में एलईडी लाइटों की मरम्मत का काम भी ठप हो जाएगा। कंपनी ने बकाये का जो बिल भेजा है उसमें उसमें 70 प्रतिशत वह राशि भी शामिल की है जिसका शासन से भुगतान होना है। अनुबंध के तहत कंपनी को रखरखाव के एवज में 30 प्रतिशत राशि नगर निगम को देनी है।
सुधरने के बजाय बिगड़ गई व्यवस्था
राजधानी में ऊर्जा बचत के लिए सोडियम व ट्यूब लाइटें हटाकर एलईडी लाइटें वर्ष 2018 में लगाई गई थीं, लेकिन यह बदलाव हमेशा विवाद में रहा। सोडियम व ट्यूब लाइटें उतारते समय तोड़ देना, जितनी लाइटें उतारी गईं उससे कम स्टोर में जमा होने पर भी विवाद खड़ा हुआ। लाइटें जानबूझ कर तोड़े जाने को लेकर नगर निगम से पुलिस तक में शिकायत दर्ज कराई गई। फिर कम रोशनी की एलईडी लाइटें लगाने का मामला सदन में उठा। इसके साथ ही रखरखाव में लापरवाही को लेकर लगातार नगर निगम से शासन तक शिकायतें दर्ज हो रही हैं। कंपनी ने तीन माह पहले भी रखरखाव का काम ठप कर दिया था। हालांकि, दबाव के बाद कुछ लाइटों को ठीक किया, लेकिन अब फिर काम बंद करने का अल्टीमेटम दे दिया है। कंपनी की लापरवाही पर पार्षद मुन्ना मिश्रा, अमित चौधरी, समीर पाल सोनू, अमिता सिंह, ममता चौधरी, गिरीश मिश्रा सहित ज्यादातर पार्षद इसे हटाने की मांग लगातार करते आ रहे हैं।
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बंद नहीं की जा सकती मार्ग प्रकाश सेवा
अपर नगर आयुक्त अमित कुमार ने कहा कि कंपनी से लगातार बात हो रही है। मार्ग प्रकाश आवश्यक सेवा है। इसे बंद नहीं किया जा सकता। कंपनी से कहा गया है कि वह बिल को संशोधन के साथ दे, जिसमें यह बताए कि नगर निगम को कितना देना है और शासन को कितना देना है। कंपनी ने एग्रीमेंट के तहत अभी आटोमेटिक कंट्रोल सेंटर भी नहीं बनाए हैं, जिससे नगर निगम को भी काम कराना पड़ता है। कोरोना काल है, ऐसे में भुगतान में कुछ समस्या हो सकती है, लेकिन उसे दूर कराया जाएगा।
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