इस चक्कर में जोशी लखनऊ विवि के रवींद्र नाथ टैगोर पुस्तकालय और अमीरुद्दौला पुस्तकालय में घंटों गुजारते। वहां किताबें पढ़ते। हजरतगंज आते तो ‘आक्सफोर्ड बुकडिपो’ में घुस जाते और वहां आई नई किताबों को उलट-पलटकर देखते। उनके पन्ने खोलकर पढ़ते और उन्हें दिमाग में बैठाने की कोशिश करते।
तब ‘आक्सफोर्ड बुकडिपो’ में लंदन से जान लेह्मान के संपादन में प्रकाशित पत्रिका ‘पेनगुइन न्यू राइटिंग’ भी बिक्री के आती थी। पैसे न होने से जोशी इस पत्रिका को दुकान में ही पूरी पढ़ जाने का प्रयास करते थे। जिस पर एक बार दुकानदार ने आपत्ति भी कर दी। बेचारे! जोशी जी लखनऊ में केवल एक किताब खरीद पाए और वह भी सेकंड हैंड। किताब के लेखक थे ‘चार्ल्स डिकेन्स।’ और किताब का नाम था, ‘’स्केचेज बाइ बॉज।’