यह ठीक है कि कांग्रेस में कई खराबियां आ गई हैं। उन्हें दूर करने की कोशिश कर रहा हूं। देखा जाएगा कि कहां तक सफल होता हूं। पर, कांग्रेस छोड़ने की बात कत्तई नहीं है। कांग्रेस का हूं और अंतिम सांस तक कांग्रेस का ही रहूंगा।’ जब बाबू जी कांग्रेस के अध्यक्ष हुए तो उनका स्वागत हुआ।
लखनऊ में भी स्वागत हुआ। बाबू जी का माल्यार्पण हो रहा था। एक महिला मंच तक तो आई, लेकिन फिर उसने टंडन जी को माला पहनाने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया, ‘अपने हाथ से माला नहीं पहनाएंगी क्योंकि बाबू जी हिंदुओं की तरफ ज्यादा झुकते हैं और मुसलमानों की तरफ उससे कम। इसलिए वह उनको नहीं छुएंगी।