आज भले ही स्थितियां बदल गई हों लेकिन एक जमाने में जानी-मानी हस्तियां लखनऊ के कॉफी हाउस में बैठा करती थीं। सियासी दलों की बात हो या सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हस्तियों की। पत्रकारिता हो या प्रशासन का क्षेत्र। सभी क्षेत्रों के प्रमुख चेहरों से कॉफी हाउस गुलजार रहा करता था।
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- फोटो : डेमो
कभी यह मशहूर था कि यूपी की सियासत की नब्ज समझनी हो या अलग-अलग क्षेत्रों में कहां क्या चल रहा है, इसे जानना हो तो कहीं और नहीं, कॉफी हाउस चले जाओ। कॉफी हाउस लंबे समय तक ‘कॉफी पीयो लेकिन पेमेंट करना मना है’ नियम को लेकर भी चर्चित रहा।
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लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कपूर ने संस्मरण में लिखा है, ‘जाने-माने चिकित्सक डॉ. पीडी कपूर लखनऊ के महापौर रहे। वह यूपी के स्वास्थ्य मंत्री भी रहे। डॉ. कपूर नियमित रूप से कॉफी हाउस जाया करते थे। कॉफी हाउस की एक मेज उनके नाम पर रिजर्व रहती थी।
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इस मेज का एक अलिखित नियम था कि उस पर बैठकर कॉफी कोई पीए लेकिन उसका भुगतान डॉक्टर साहब ही करेंगे। वह भले ही लखनऊ का कोई बड़े से बड़ा व्यक्ति ही क्यों न हो। एक बार मशहूर वकील वीरेन्द्र भाटिया, डॉ. कपूर की मेज पर बैठ गए और कॉफी पी।
कॉफी पीने के बाद उन्होंने भुगतान के लिए पैसे निकाले तो यह कहकर पेमेंट लेने से मना कर दिया गया कि इस मेज पर आने वाली कॉफी का पेमेंट तो डॉ. कपूर साहब ही करेंगे। डॉ. कपूर की तरह ही आईजी इस्लाम अहमद, मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर सीपी मिश्र की मेेजें भी तय थीं। जिन पर कॉफी पीयो और चाहे जो खाओ लेकिन भुगतान करना मना था।’