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Babbar Khalsa: मां-बाप ने अपनाया ईसाई धर्म, पाकिस्तान से सीधा कनेक्शन; कोड वर्ड 'आलू'... सामान 'तबाही का'

Fri, 07 Mar 2025 10:16 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

UP STF Operation: विस्फोटक घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो रहे आतंकियों के छिपने का कौशांबी जिला पहले से मुफीद ठिकाना बना हुआ है। चाहे वह कानपुर में बम विस्फोट हो या फिर कौशाम्बी के एक मदरसे के जरिये आतंकी गतिविधि से जुड़े होने का मामला। 
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Babbar Khalsa International terrorist - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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UP Police News: यूपी एसटीएफ ने महाकुंभ में आतंकी हमले की साजिश को नाकाम किया। टीम ने 6 मार्च को तड़के पहर आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के फरार आतंकी लजर मसीह को कौशांबी जिले से गिरफ्तार कर लिया। वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और बब्बर खालसा के इशारे पर महाकुंभ में विस्फोट करने और गोलाबारी करने का मौका तलाश रहा था। लेकिन, सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता की वजह से कामयाब नहीं हुआ। उसके पास से 3 हैंडग्रेनेड, दो डेटोनेटर, जिलेटिन रॉड, एक रशियन पिस्टल, 13 कारतूस, सफेद रंग का विस्फोटक आदि बरामद हुए हैं। 

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डीजीपी प्रशांत कुमार और एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश ने लजर मसीह को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह लखनऊ, कानपुर, कौशांबी में घूमकर महाकुंभ में घुसपैठ करने का मौका तलाश रहा था। खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियों के हाई अलर्ट पर रहने की वजह से वह कामयाब नहीं हो सका। 

आतंकी हमला करने के बाद अपने साथी के पास पुर्तगाल भागने की तैयारी में था। उसने गाजियाबाद के फर्जी पते से आधार कार्ड बनवाया था। इसके जरिए पासपोर्ट बनाने का आवेदन भी किया था। अमृतसर के थाना रामदास के कुरलियां गांव निवासी लजर मसीह सिख नहीं है। उसके माता-पिता ने ईसाई धर्म अपना लिया था। वह पाकिस्तान में बैठे तीन आईएसआई एजेंटों के संपर्क में था। 

हथियार भेजने का कोडवर्ड था आलू

डीजीपी ने कहा कि पंजाब पुलिस ने सूचना दी थी कि लजर को पाकिस्तान में बैठे उसके हैंडलर ड्रोन के माध्यम से गोला बारूद व असलहा उपलब्ध कराते हैं, जिसे लजर और उसके साथी आतंकी हमलों में इस्तेमाल करते हैं। पंजाब पुलिस से उसकी फोटो भी भेजने के साथ सूचना दी थी कि पंजाब में पुलिस चौकियों पर हुए ग्रेनेड हमले की जिम्मेदारी बब्बर खालसा इंटरनेशनल के जर्मन बेस्ड मॉड्यूल के हेड जीवन फौजी उर्फ स्वर्ण सिंह ने ली थी। इन सभी घटनाओं में लजर या उसके सहयोगियों के द्वारा ही ग्रेनेड उपलब्ध कराए गए थे। इसका कोडवर्ड आलू था।

आतंकियों के छिपने का ठिकाना बनता जा रहा कौशांबी

कानपुर में वर्ष 1998 में विस्फोट की घटना अंजाम दी गई थी। उसमें कौशांबी के कड़ाधाम व पूरामुफ्ती इलाके के दो युवकों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। कानपुर पुलिस उन्हें पकड़कर साथ ले गई थी। पूछताछ में पता चला कि वह आतंकी संगठन सिमी के सदस्य थे। उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई। बाद में जमानत पर छूटे दोनों युवक कामधंधे लगे हैं। इन पर खुफिया तंत्र की आज भी नजर है।

इसी तरह मेरठ का रहने वाला एक युवक 10 साल पहले करारी कस्बे में रह रहा था। उसकी गतिविधि को लेकर पता चला कि वह जिले के एक चर्चित मदरसे की मदद से आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ था। ऐसे में खुफिया तंत्र ने उसकी धरपकड़ कर पूछताछ भी की। हालांकि गोपनीय जांच में पुलिस के हाथ खाली रहे। इसके बाद युवक हमेशा के लिए करारी छोड़कर कहीं चला गया।

गैर प्रांत के लोगों का जनपद में आवागमन रहता है

बताया गया कि कौशाम्बी जिले के लोग कामधंधे की तलाश में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में आते-जाते रहते हैं। ऐसे में वहां के स्थानीय लोगों से जिलेवासियों का खासा संपर्क हो जाता है। किसी न किसी कार्यक्रम या फिर मिलने के उद्देश्य से गैर प्रांत के लोगों का जनपद में आवागमन रहता है। ऐसे लोगों पर भी खुफिया तंत्र की नजर नहीं रहती। नतीजतन लाजर मसीह जैसे आतंकियों की गतिविधि जिले में होना आम बात मानी जा रही है।

जनपद में बेरोजगारी का दंश झेल रहे कामगार नौकरी व मजदूरी के सिलसिले से गैर जनपद या प्रांत में रहते हैं। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में रहकर वह रोजी रोटी का जुगाड़ करते हैं। लंबे समय तक रहने के कारण जिले के कामगारों का गैर जनपद के स्थानीय लोगों से गहरा नाता हो जाता है। 

कानपुर और लखनऊ में भी रही सक्रियता

ऐसे में अक्सर जनपद में विभिन्न राज्यों के रहने वाले लोगों का आवागमन बना रहता है। चाहे वह किसी के यहां कोई कार्यक्रम रहा हो या फिर मिलने का बहाना। आतंकी लाजर मसीह के पकड़े जाने के बाद यह बात भी सामने आई कि वह महाकुंभ में विस्फोट की तैयारी को लेकर साजिश रच रहा था। उसकी सक्रियता कानपुर और लखनऊ में भी रही है। 

हालांकि, कौशाम्बी में लजर मसीह कहां छिपा था, यह जानकारी अब तक सामने नहीं आई। पुलिस का दावा है कि उसे मुखबिर की सूचना पर कोखराज के सकाढ़ा चौराहा से गिरफ्तार किया गया है। गैर प्रांतों व जनपद से आने वाले लोगों पर खुफिया तंत्र नजर रखे तो और भी चौंकाने वाले मामले सामने आ सकते हैं।

पीलीभीत कनेक्शन ढूंढ रही पुलिस

इसके अलावा पुलिस आतंकी लजर का पीलीभीत कनेक्शन भी खंगाल रही है। दरअसल बीती 23 दिसंबर को पीलीभीत और पंजाब पुलिस के साझा आपरेशन में पूरनपुर क्षेत्र में हरदोई ब्रांच नहर पुल से माधोटांडा जाने वाले मार्ग पर मारे गए तीन खालिस्तानी आतंकियों से संबंध और फर्जी पासपोर्ट की कड़ी भी जांच में शामिल हैं। 

आतंकियों की पहचान पंजाब के गुरदासपुर जिले के रहने वाले गुरविंदर सिंह, वरिंदर सिंह उर्फ रवि और जसनप्रीत सिंह उर्फ प्रताप सिंह के तौर पर हुई थी। तीनों कलानौर थाने की बख्शीवाल पुलिस चौकी पर ग्रेनेड फेंकने की घटना को अंजाम देकर पूरनपुर पहुंचे थे। वरिंदर सिंह उर्फ रवि से लजर की कई बार बात हुई थी। 
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कुलबीर एनआईए का इनामी आतंकी है

पुलिस ने आतंकियों के स्थानीय कनेक्शन तलाशे तो बब्बर खालसा के आतंकी कुलबीर सिंह सिद्धू का नाम सामने आया। कुलबीर ने ही आतंकियों को पूरनपुर के होटल में ठहराने के लिए स्थानीय मददगार जसपाल उर्फ सनी को भेजा था। फर्जी आधार भी मुहैया कराया था। कुलबीर एनआईए का इनामी आतंकी है।
 
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