पूर्व सीएमओ का खंडहर हो चुका घर
डॉ. एमएम माथुर बड़े चिकित्सा अधिकारी थे, बलरामपुर अस्पताल में भी तैनात रहे। इस परिवार में सभी सुख-सुविधाएं थीं। घूमना-फिरना और ऐशो-आराम सभी कुछ उनके पास था। लेकिन इन बहनों के अनुसार, पहले मां और फिर पिता की मौत के बाद जैसे विपत्तियों का पहाड़ उन पर टूटा। एक बहन अपना मानसिक संतुलन खो बैठी। परिवार में बड़े भाई बीएन माथुर परिवार को संभाल नहीं पाए। इसके बाद लगातार हालात बिगड़े और अंत में भीख मांगना ही उनके लिए अस्तित्व को बचाए रखने का जरिया बना।
करीब 25 वर्ष में उनका घर खंडहर हो चुका है। घर के बाथरूम से लेकर अन्य टूटे-फूटे निर्माण वैभवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। वहीं 60 वर्ष से अधिक उम्र की मानसिक रूप से अस्वस्थ दोनों बहनें किसी प्रकार अपने दिन यहां काट रही हैं। फिलहाल उनके कोई रिश्तेदार भी फिलहाल उनके संपर्क में नहीं हैं। कभी-कभी कुछ नागरिक और स्वयंसेवी संगठन उनकी मदद कर देते हैं, लेकिन यह उन्हें से सम्मानजनक जीवन देने के लिए काफी नहीं है। पड़ोस में रहने वाले आरके अग्रवाल, शिवांगी और अरुण जैसे लोग कभी-कभी उनकी मदद करते रहते हैं। विशेष रूप से खाना मुहैया करवाने में। लेकिन दोनों बहनें खुद भी इस प्रकार की मदद नहीं चाहतीं, उन्हें एक केयरटेकर जैसे व्यक्ति की जरूरत है जो इन बुजुर्गों को संभाल सके और उनके लिए सहारा बने।
आरके अग्रवाल ने बताया कि एक साल पहले दोनों के भाई-बहन यहां आ चुके हैं। लेकिन उसके बाद वे यहां नहीं आते। एक साल पहले उनके साथ रह रहे एक अन्य भाई की मौत हुई तो दो दिन तक शव पड़ा रहा। लेकिन कोई रिश्तेदार घर में नहीं आया। बाद में पड़ोसियों ने ही किसी तरह अंतिम संस्कार करवाया, साथ ही परिवारीजनों को किसी तरह ढूंढ कर संपर्क किया गया। बाद से वे फिर से संपर्क से बाहर हो गए हैं।