साल 1934 में विवादित ढांचे के अंदर मूर्तियां रखने के बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने में जिन्हें गिरफ्तार किया गया था उनमें हाशिम अंसारी भी शामिल थे। लोगों ने उनसे मुकदमा करने को कहा तो वे बाबरी मस्जिद के पैरोकार हो गए। लेकिन, कानूनी लड़ाई से इतर वे अमन के पैरोकार भी थे।
दंगाइयों के हमले में हिंदुओं ने बचाया
हाशिम का जन्म 1921 में हुआ था। जब वह 11 साल के थे, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। दर्जा दो तक पढ़े हाशिम के परिवार की आमदनी का जरिया सिलाई था। 6 दिसंबर 1992 में शहर के बाहर से आए लोगों ने घर जला दिया था। लेकिन अयोध्या के हिंदुओं ने उन्हें और उनके परिवार को बचाया।
सरकार से उन्हें जो मुआवजा मिला उन्होंने अपना घर दोबारा बनवाया और एक एंबेसडर कार खरीदी थी। उनका बेटा मोहम्मद इकबाल इसी एंबेसडर को टैक्सी के तौर पर हिंदू तीर्थयात्रियों को अयोध्या के मंदिरों का दर्शन कराते हैं।
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में हाशिम अंसारी कांग्रेस को दोषी मानते थे। वहीं, मुस्लिम नेताओं के भी आलोचक थे। सन 1961 में जब सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मुकदमा किया था तब उसमें हाशिम पहले मुद्दई बने।
पुलिस प्रशासन की सूची में नाम होने की वजह से 1975 में इमरजेंसी के दौरान उन्हें भी 8 महीने तक बरेली सेंट्रल जेल में रखा गया था। इसके लिए उन्होंने कभी कांग्रेस को माफ नहीं किया।