अखबार का प्रकाशन कर रहे थे यहियागंज मोहल्ले के रामकिशोर रस्तोगी और बरेली निवासी बृजगोपाल शर्मा। छह महीनों तक ब्रिटिश गुप्तचर अखबार और छापने वालों का पता नहीं लगा सके। पर, 7 फरवरी, 1943 को इसके एक कंपोजीटर ने अंग्रेजों से मुखबिरी कर दी।
अंग्रेजों ने छापा मारकर 2000 प्रतियां, हैंडप्रेस जब्त कर रस्तोगी व शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इस मुखबिर की गद्दारी ने लखनऊ से अंग्रेजों के खिलाफ गूंजने वाली ‘जन्मभूमि’ की आवाज को दबा दिया।