सत्ता के गलियारे में आजकल नीतूजी के बड़े चर्चे हैं। नीतूजी का प्रोफाइल तो ज्यादा किसी को पता नहीं है लेकिन इतना सबको पता है कि बिना उनकी मर्जी के कोई ‘सरकार’ के सरकारी आवास में घुस नहीं सकता।
चाहे कितना बड़ा अफसर या नेता क्यों न हो। नीतूजी के दबदबे का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि जब तक वे नहीं चाहते, किसी को ‘सरकार’ के कार्यक्रम का पता नहीं चल सकता।
ऐसे में वे कई ऐसे कार्यक्रमों का भी अफसर व्यापक प्रचार-प्रसार या मीडिया कवरेज नहीं करा पाते। बेचारे पंचम तल के अधिकारी भी नीतूजी के सामने कोई हैसियत नहीं रखते।
‘सरकार’ के बुरे दिनों के संगी-साथी भी परेशान हैं। ‘सरकार’ की नाक के बाल हैं, इसलिए किसी की क्या मजाल जो उनके बारे में कुछ कहे।
लेकिन पंचम तल से लेकर पार्टी मुख्यालय तक दबी जुबान यह चर्चा जरूर है कि नीतूजी इसी तरह सक्रिय रहे तो हश्र कहीं पिछली सरकार जैसा न हो जाए।